Balaghat News : बालाघाट। 1990 के दशक से लाल उग्रवाद का शिकार बालाघाट जिला अब पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो गया। गुरुवार को मलाजखंड दलम के डिप्टी कमांडर दीपक उर्फ सुधाकर उर्फ मंगल उइके (DVCM रैंक, 1995 से सक्रिय) और उसके साथी रोहित (ACM, दर्रेकसा एरिया कमिटी) ने हथियार डाल दिए। सरेंडर सीआरपीएफ कैंप कोरका (बिरसा थाना) में हुआ। दीपक ने स्टेनगन समेत हथियार जमा किए। यह सरेंडर मिशन 2026 को साढ़े तीन महीने पहले पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
सरेंडर की औपचारिक प्रक्रिया चल रही (Balaghat News)
दीपक पालगोंदी गांव का रहने वाला था और माओवादी संगठन का चालाक रणनीतिकार माना जाता था। लेकिन सुरक्षाबलों की सघन सर्चिंग और लगातार एक्शन से मजबूर होकर उसने आत्मसमर्पण किया। SP आदित्य मिश्रा ने पुष्टि की कि सरेंडर की औपचारिक प्रक्रिया चल रही है। जनवरी में जिले को आधिकारिक रूप से नक्सल-मुक्त घोषित किया जा सकता है।
हाल के सरेंडरों का दौर (Balaghat News)
– 7 दिसंबर – बालाघाट में CM मोहन यादव की मौजूदगी में KB डिवीजन के 10 माओवादी (₹2.36 करोड़ इनामी) सरेंडर।
– 8 दिसंबर – छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में ₹1 करोड़ इनामी रामधेर मज्जी सहित 12 माओवादी सरेंडर।
2025 में बालाघाट में 2,350 से ज्यादा एंटी-नक्सल ऑपरेशन चले, 8 माओवादी मारे गए और 24 से ज्यादा सरेंडर कर चुके हैं। गृह मंत्री अमित शाह के मार्च 2026 के लक्ष्य से पहले ही बालाघाट मुक्त हो गया। CM यादव ने कहा, “यह पुलिस की बड़ी सफलता है। बाकी जिलों को भी जल्द नक्सल-मुक्त बनाएंगे।”
सरेंडर करने वालों को पुनर्वास पैकेज (रोजगार, शिक्षा, ₹5 लाख अनुदान) मिलेगा। अब सुरक्षाबलों का फोकस दक्षिणी MMC जोन पर है। बालाघाट के ग्रामीणों में खुशी की लहर है – “आखिरकार डर खत्म हुआ।”