Balaghat News : बालाघाट। आज माओवाद से मुक्त बालाघाट ने वह दौर भी देखा है जब लाल आतंक विकास की सबसे बड़ी राह में रोड़ा था। 2003-04 में लांजी से सालेटेकरी तक 61 किमी की दुर्गम सड़क बनाने वाले ठेकेदार राधेश्याम पटेल (मेसर्स रायसिंग एंड कंपनी) ने उस वक्त की दहशत भरी दास्तान साझा की।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत यह MP की सबसे लंबी सड़क थी। माओवादी प्रभावित इलाके में विशेष पैकेज से बननी थी। काम शुरू किया तो माओवादियों ने पैसों की मांग की। मना करने पर 4 डंपर, एक पेवर और एक रोलर जला दिए। नुकसान ढाई करोड़ से ज्यादा हुआ।
“मैंने एक रुपया नहीं दिया। काम जारी रखा।” राधेश्याम ने कहा। आगजनी के बाद तत्कालीन SP जगदीश प्रसाद ने 300 हॉक फोर्स जवान भेजे। ठेकेदार खुद जवानों के लिए चाय-नाश्ता-भोजन का इंतजाम करते थे। एक साल का काम महज 9 महीने में पूरा हो गया।
साहस की कहानी वायरल (Balaghat News)
हॉक फोर्स में पदस्थ DSP संतोष पटेल ने अपने फेसबुक पर वीडियो शेयर किया, जिसमें उनका ड्राइवर उस दौर की कहानी सुना रहा है। ड्राइवर बोला – “ठेकेदार जिद्दी थे। माओवादियों से डरे नहीं, आखिर तक हार नहीं मानी।” यह सड़क आज आदिवासी इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ रही है। माओवाद के खात्मे के बाद बालाघाट विकास की नई राह पर है। ठेकेदार राधेश्याम पटेल का साहस आज भी मिसाल है।