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Balaghat News : नक्सली कबूल रहे गुनाह, मंत्री रहे लिखीराम कावरे की जघन्य हत्या में शामिल थे ये माओवादी

Balaghat News : नक्सली कबूल रहे गुनाह, मंत्री रहे लिखीराम कावरे की जघन्य हत्या में शामिल थे ये माओवादी

Balaghat News : बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की पूछताछ में कई पुरानी हिंसक घटनाओं का खुलासा हो रहा है। 7 दिसंबर 2025 को आईजी बंगले में सरेंडर करने वाले केबी डिवीजन के 10 माओवादियों में शामिल एमएमसी जोनल कमेटी के सचिव सुरेंद्र उर्फ कबीर (62 लाख रुपये का इनामी) ने कई गंभीर अपराध कबूल किए हैं। कबीर पर बालाघाट क्षेत्र को दहला देने वाली कई घटनाओं का आरोप है, जिसमें 2013 के छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी हमले में शामिल होना और स्थानीय ग्रामीणों की निर्मम हत्याएं शामिल हैं।

पूछताछ में कबीर ने स्वीकार किया कि उसने 2021 और 2022 में कान्हा नेशनल पार्क के बफर जोन से सटे गांव मालखेड़ी में तीन ग्रामीणों की हत्या की थी। ये हत्याएं मुखबिरी के शक में की गईं। कबीर 2013 के झीरम घाटी हत्याकांड में भी शामिल रहा, जिसमें 32 लोग मारे गए थे।

चंदू उर्फ नरेश ने भी किया बड़ा खुलासा (Balaghat News)

इसी तरह, छत्तीसगढ़ में 8 दिसंबर को कुख्यात माओवादी रामधर के साथ सरेंडर करने वाला 33 लाख रुपये का इनामी चंदू उर्फ नरेश ने भी बड़ा खुलासा किया है। बालाघाट पुलिस की पूछताछ में चंदू ने बताया कि वह 1999 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन परिवहन मंत्री लिखीराम कावरे की जघन्य हत्या में शामिल था। हालांकि चंदू ने कहा कि उसे इस हत्या की पहले से जानकारी थी। इस निर्मम हत्या ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था।

मंगलवार (16 दिसंबर) को लिखीराम कावरे की 26वीं पुण्यतिथि है। इस हत्याकांड की यादें फिर ताजा हो गई हैं, क्योंकि सरेंडर करने वाले माओवादी के बयान से 26 साल पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है।

27 माओवादियों ने मिलकर की थी मंत्री कावरे की हत्या (Balaghat News)

16 दिसंबर 1999 को तत्कालीन मंत्री लिखीराम कावरे की कुल्हाड़ी से हमला कर निर्मम हत्या कर दी गई थी। यह हत्या 27 माओवादियों ने मिलकर अंजाम दी थी। योजना आंध्र प्रदेश में बनी थी, जिसमें मलाजखंड दलम के 12 और स्पेशल गुरिल्ला स्क्वॉड (एसजीएस) के 15 माओवादी शामिल थे।

पहले भी 2015 में गिरफ्तार 35 लाख रुपये के इनामी माओवादी दिलीप गुहा ने इस हत्याकांड से जुड़े कई राज खोले थे। हाल के सरेंडर और पूछताछ से मध्य प्रदेश में माओवादी हिंसा के सफाए की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है, लेकिन पुराने जख्म फिर हरे हो गए हैं।

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