यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे।
विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला।
तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था।
गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे।
विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला।
तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था।
गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।