मूल रूप से कैलारस मुरैना के रहने वाले अवधेश शिवहरे वर्तमान में ग्वालियर की सीपी कॉलोनी में किराए से रहते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि जनवरी की शुरुआत में उन्होंने गूगल पर लोन के लिए सर्च किया था। इस दौरान मिले एक नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताया और लोन प्रक्रिया के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और सैलरी स्लिप जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल कर लिए।
जालसाजों ने ठगी के लिए ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का सहारा लिया। 6 से 13 जनवरी के बीच हुई इस साजिश में पीड़ित के पास गुरुग्राम स्थित आईडीएफसी IDFC बैंक के नाम से ₹6.49 लाख का फर्जी लोन स्वीकृति संदेश भी भेजा गया। इसके बाद ठग ने पीड़ित को विश्वास में लेकर कहा कि वह क्रेडिट कार्ड के जरिए इस पर ‘टॉपअप’ दिला सकता है। इस प्रक्रिया के लिए ₹2.5 लाख की ‘सिक्योरिटी डिपॉजिट’ मांगी गई, जिसे पीड़ित ने झांसे में आकर ट्रांसफर कर दिया। रकम मिलते ही आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर लिया।
मुरार थाना पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह फर्जी कॉल और सोशल इंजीनियरिंग का मामला लग रहा है। साइबर टीम उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है जहाँ राशि ट्रांसफर की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि आधिकारिक बैंकिंग पोर्टल के अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति को दस्तावेज देना या अग्रिम भुगतान करना हमेशा वित्तीय जोखिम को न्यौता देता है।