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Bhopal News : भोपाल का नाम बदलने की मांग, सांसद आलोक शर्मा बोले – शहर की पहचान सिर्फ नवाबों से नहीं

Bhopal News : भोपाल का नाम बदलने की मांग

Bhopal News : भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े सांसद आलोक शर्मा ने शहर के समृद्ध अतीत को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने मांग की है कि मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MPBSE) के हिंदी विषय के पाठ्यक्रम में भोपाल के व्यापक इतिहास को शामिल किया जाए। शर्मा ने स्पष्ट कहा कि भोपाल का चरित्र केवल मुस्लिम शासकों तक सीमित नहीं है; यहां हिंदू राजाओं ने लगभग 700 वर्षों तक शासन किया, जिसे स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए। यह बयान सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान आया।

‘भोपाल अशोक, भोज और कमलापति का शहर’ (Bhopal News) :

प्रेस वार्ता में बोलते हुए भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा, “भोपाल का गौरवशाली इतिहास 1000 वर्ष पुराना है। यह सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, पृथ्वीराज चौहान, राजा भोज, परमार वंश और रानी कमलापति का शहर है। 700 वर्षों तक हिंदू शासकों का राज रहा, उसके बाद बेगमों और नवाबों का दौर आया।” उन्होंने विलय आंदोलन (हैदराबाद, जूनागढ़ और भोपाल के नवाबों के भारत में विलय) को भी पाठ्यक्रम में जोड़ने की अपील की, ताकि युवा पीढ़ी सही इतिहास से परिचित हो। शर्मा ने जोर दिया कि भोपाल सभी समुदायों का है, लेकिन इसका प्राचीन वैभव संरक्षित रखना जरूरी है।

यह मांग हाल ही में NCERT के इतिहास पाठ्यक्रम में बदलावों के बाद आई है, जहां शर्मा ने भोपाल के ‘वैदिक शहर’ के अवशेषों की खोज की भी बात कही। उन्होंने ऊपरी झील के नीचे संभावित प्राचीन संरचनाओं की जांच के लिए पुरातत्व विभाग से आग्रह किया।

सरदार@150 यूनिटी मार्च: राष्ट्रीय एकता का संदेश (Bhopal News)

शर्मा का यह बयान सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सरदार@150 यूनिटी मार्च’ के प्रचार कार्यक्रम के दौरान आया। यह राष्ट्रव्यापी अभियान 31 अक्टूबर से 26 नवंबर तक चलेगा, जो पटेल के ‘एक भारत, आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने पर केंद्रित है। भोपाल-सीहोर लोकसभा क्षेत्र में तीन पदयात्राएं निर्धारित हैं:

11 नवंबर : वल्लभ भवन से न्यू मार्केट तक मार्च, जो राष्ट्रीय एकता और जन-जागरूकता को बढ़ावा देगा।
12 नवंबर : बैरागढ़ क्षेत्र में दूसरी पदयात्रा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 नवंबर को सुबह 8:30 बजे वल्लभभाई पटेल पार्क से यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। शर्मा ने मार्ग, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और विभागीय जिम्मेदारियों पर विस्तृत योजना साझा की, ताकि सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित हो। यह मार्च पटेल के योगदान—विशेषकर 562 रियासतों का एकीकरण—को याद करने का माध्यम बनेगा।

शर्मा के बयान ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्ष ने इसे ‘सांप्रदायिक’ बताते हुए निंदा की, जबकि BJP नेताओं ने समर्थन किया। फिर भी, यह पहल भोपाल के बहुआयामी इतिहास को शिक्षा प्रणाली में लाने की दिशा में एक कदम हो सकती है, जो युवाओं को समावेशी विरासत से जोड़ेगी।

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