Patwari Arrested : मंदसौर । मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई एक बार फिर सुर्खियों में है। मंदसौर जिले के सुवासरा तहसील में पदस्थ पटवारी हरीश पाटीदार को रिश्वत की दूसरी किस्त ₹30,000 लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत की जा रही है और मामले में जांच तथा अन्य कदम जारी हैं।
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब एक किसान दिनेश चंद्र जोशी ने उज्जैन लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई कि उसका दत्तक पुत्र आनंद जोशी के नाम पर कृषि भूमि का नामांतरण करवाने के लिए पटवारी ने पहले ₹40,000 की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने सत्यापन कराकर 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते समय पटवारी को स्थानीय तहसील कार्यालय में पकड़ा।
आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) 2018 की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के हिस्से के रूप में सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लोकायुक्त विभाग भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सतर्क है।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने बताया कि नामांतरण के लिए पटवारी ने जबरदस्ती रिश्वत की मांग की थी और नामांतरण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा रहा था, जिसके बाद उन्होंने लोकायुक्त में शिकायत की। इस शिकायत पर लोकायुक्त टीम ने पहले सत्यापन किया और उसके बाद पटवारी को दूसरी किस्त लेते समय ट्रैप में फँसाकर गिरफ्तार किया।
मामले का यह पहलू बताता है कि आम जनता द्वारा की गई शिकायत पर लोकायुक्त की टीम ने तात्कालिक प्रतिक्रिया दी और भ्रष्टाचार के आरोप में आरोपी को पकड़कर छानबीन शुरू कर दी है। इस गिरफ्तारी ने दिखाया है कि लोकायुक्त सदैव भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार रहता है, चाहे वह किसी भी सरकारी तंत्र का अधिकारी हो।
इस गिरफ्तारी के साथ ही लोकायुक्त की टीम अब आगे पूरे मामले की जांच कर रही है, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में और कौन-कौन शामिल था। लोकायुक्त की कार्रवाई से जिले में अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है और जनता के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश भी गया है कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है।