मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ दिसंबर 2025 में आए NCLT के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान व्हाट्सएप के इस ‘यू-टर्न’ ने सबको चौंका दिया, क्योंकि कंपनी ने पहले इन निर्देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। अब व्हाट्सएप ने अपनी वह अर्जी वापस ले ली है जिसमें उसने नियामक निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की थी।
कपिल सिब्बल ने रखी दलील: 16 मार्च तक होगा अनुपालन
व्हाट्सएप की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को भरोसा दिलाया कि कंपनियां आगामी 16 मार्च तक न्यायाधिकरण के सभी निर्देशों को पूरी तरह से लागू कर देंगी। इस पर पीठ ने न केवल स्थगन याचिकाओं को खारिज कर दिया, बल्कि कंपनियों से एक विस्तृत ‘अनुपालन रिपोर्ट’ Compliance Report भी तलब की है। हालांकि, अदालत ने यह साफ कर दिया कि इस सहमति का मुख्य अपील में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उन पर अलग से विचार किया जाएगा।
213 करोड़ का जुर्माना और ‘डेटा’ का खेल
यह पूरा विवाद व्हाट्सएप की 2021 की विवादास्पद गोपनीयता नीति से शुरू हुआ था। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग CCI ने व्हाट्सएप पर अपनी प्रधान स्थिति का दुरुपयोग करने के लिए 213.14 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया था। CCI का आरोप था कि व्हाट्सएप ‘टेक इट ऑर लीव इट’ मानो या छोड़ो की तर्ज पर उपयोगकर्ताओं को अपना डेटा मेटा की अन्य कंपनियों के साथ साझा करने के लिए मजबूर कर रहा है।
यद्यपि NCLT ने अपने नवंबर 2025 के आदेश में उस हिस्से को हटा दिया था जिसमें विज्ञापन के लिए डेटा साझा करने पर पांच साल की पूर्ण रोक लगाई गई थी, लेकिन 213 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में 3 फरवरी को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि “नागरिकों के निजता के अधिकार के साथ ‘डेटा साझा करने’ के नाम पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।”
क्या होगा असर?
व्हाट्सएप के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब उसे भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा का उपयोग विज्ञापनों के लिए करने से पहले उनकी स्पष्ट सहमति लेनी होगी और पारदर्शिता के कड़े मानकों का पालन करना होगा। यह फैसला भारत में डिजिटल नागरिक अधिकारों और डेटा सुरक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जहां बड़ी टेक कंपनियों को भारतीय नियामकों के प्रति जवाबदेह बनाया गया है।