Invest UP के CEO विजय किरन आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर MoU की समीक्षा की गई थी। कंपनी को नोटिस भेजकर उसका बिजनेस प्लान, वित्तीय स्थिति और Detailed Project Report (DPR) मांगी गई। जवाब देने के लिए कंपनी को केवल तीन दिन का समय दिया गया, लेकिन इस दौरान कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
सरकार की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी समय पर जरूरी दस्तावेज नहीं जमा कर सकी। वित्तीय स्थिति कमजोर पाई गई और निवेश के लिए फंड का स्रोत भी स्पष्ट नहीं था। इस वजह से यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जोखिम भरा साबित हुआ।
योगी सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए Puch AI कंपनी के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही भरोसेमंद दस्तावेज। निवेश में किसी भी तरह के संभावित जोखिम से बचने के लिए सरकार ने MoU रद्द कर दिया।
इस मामले ने राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। विपक्ष के नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 25,000 करोड़ रुपये के इस निवेश को लेकर सरकार को घेरा था।
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े समझौते कर रही है। इसी कड़ी में Puch AI के साथ यह महत्त्वाकांक्षी निवेश प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि शुरुआती जांच में ही कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, जिसके चलते यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही रद्द कर दिया गया।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसी भी निवेश प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और वित्तीय क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राज्य में आने वाले निवेश सुरक्षित और प्रभावी हों और किसी तरह का वित्तीय या कानूनी जोखिम राज्य को प्रभावित न करे।
इस फैसले से यह संदेश गया कि यूपी सरकार बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स में केवल भरोसेमंद और सक्षम कंपनियों के साथ ही आगे बढ़ेगी। Puch AI का मामला एक चेतावनी भी है कि वित्तीय और प्रबंधन संबंधी कमजोरियों वाले निवेश समझौतों को राज्य सरकार बढ़ावा नहीं देगी।
अंततः, चार दिन में रद्द किया गया यह 25,000 करोड़ का MoU यह दिखाता है कि यूपी सरकार निवेशकों की विश्वसनीयता और परियोजनाओं की पारदर्शिता पर पूरी तरह ध्यान देती है और किसी भी तरह के जोखिम से राज्य को बचाने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाती है।