ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि योजना के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 25 लाख से अधिक घरों में सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यह योजना 2024 में शुरू की गई थी और यह डिमांड-ड्रिवन योजना है। इसके तहत देश के सभी घरेलू उपभोक्ता, जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम से बिजली कनेक्शन है, राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपनी छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं।
सौर ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय लाभ
सरकार का अनुमान है कि अगर एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएँ, तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव होगा। इसके साथ ही इन सिस्टम के 25 साल के जीवनकाल में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इस पहल से ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
2025 के अंत तक योजना को लागू करने में गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान सबसे आगे रहे हैं। ये राज्य सौर ऊर्जा के उत्पादन और घरों में सोलर सिस्टम के विस्तार में शीर्ष पर हैं।
नॉन-फॉसिल फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन में भारत की प्रगति
मंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है, जिसमें 135.81 गीगावाट सौर ऊर्जा, 54.51 गीगावाट पवन ऊर्जा, 11.61 गीगावाट जैव ऊर्जा, 5.16 गीगावाट लघु जल विद्युत और 50.91 गीगावाट वृहद जल विद्युत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी शामिल है।
सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को भी लागू किया है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह मिशन देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है और भविष्य में हरित ऊर्जा समाधान के लिए भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।