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चंडीगढ़ ब्रांच फ्रॉड केस में बड़ा कदम, IDFC First Bank ने चुकाए 645 करोड़ रुपये के दावे


नई दिल्ली। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक IDFC First Bank ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी चंडीगढ़ शाखा में सामने आए धोखाधड़ी मामले से जुड़े सभी दावों का निपटारा कर दिया है। बैंक ने प्रभावित खातों से जुड़े कुल 645 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। यह राशि बैंक के शुरुआती अनुमान से करीब 55 करोड़ रुपये अधिक है।

बैंक ने यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी और स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में कोई नई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। बैंक के मुताबिक सभी दावे उसी घटना और उसी चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हैं और फिलहाल किसी नए मामले की पुष्टि नहीं हुई है।

शुरुआती अनुमान से बढ़ी भुगतान राशि
बैंक के अनुसार शुरुआत में धोखाधड़ी की राशि करीब 590 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि बाद में जांच और खातों के मिलान के दौरान कुछ अतिरिक्त दावे सामने आए, जिसके बाद कुल भुगतान बढ़कर 645 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बैंक ने कहा कि उसने सभी प्रभावित ग्राहकों के दावों का निपटारा अपने निर्धारित सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि 25 फरवरी 2026 के बाद देश भर में इस घटना से संबंधित कोई नया दावा सामने नहीं आया है।

ग्राहकों के खातों का पूरा मिलान
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि इस मामले से जुड़े सभी खातों का मिलान पूरा कर लिया गया है। बैंक ने कहा कि यह घटना केवल चंडीगढ़ की एक शाखा तक सीमित थी और पूरे बैंकिंग सिस्टम पर इसका कोई व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा है।

बैंक ने अपने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह भी कहा कि वह इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा और धोखाधड़ी से हुई राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी रखेगा।

बैंक के डिपॉजिट बेस पर नहीं पड़ा असर
बैंक के मुताबिक इस घटना के बावजूद उसके डिपॉजिट बेस पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। 28 फरवरी 2026 तक बैंक का कुल डिपॉजिट 2,92,381 करोड़ रुपये रहा, जबकि दिसंबर 2025 के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपये था।

इससे साफ संकेत मिलता है कि ग्राहकों का भरोसा बैंक पर बना हुआ है और जमा राशि में स्थिरता बनी हुई है। बैंक ने यह भी बताया कि उसका लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) मौजूदा तिमाही में 114 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर है, जो बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूत दर्शाता है।

हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ा था मामला
इससे पहले सामने आई जानकारी के अनुसार यह मामला Haryana सरकार के कुछ खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित था। इस मामले में बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने अंतरराष्ट्रीय ऑडिट फर्म KPMG को फॉरेंसिक ऑडिट का जिम्मा सौंपा है। उम्मीद है कि इस ऑडिट की अंतिम रिपोर्ट अगले चार से पांच सप्ताह के भीतर सामने आ जाएगी, जिससे पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

जांच पूरी होने तक चार अधिकारी निलंबित
बैंक ने इस घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। बैंक का कहना है कि जांच पूरी होने तक ये अधिकारी अपने पद पर नहीं रहेंगे। इस बीच घटना के बाद Government of Haryana ने एहतियाती कदम उठाते हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ-साथ AU Small Finance Bank को भी सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

बैंक ने कहा कि जांच पूरी होने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल वह ग्राहकों के हितों की सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।

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