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ग्रामीण विकास को रफ्तार: केंद्र ने 6 राज्यों को जारी किए 1500 करोड़ से ज्यादा

नई दिल्ली  ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने 15वां वित्त आयोग के तहत 6 राज्यों को 1,500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की है। इस फंड का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत बनाकर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति देना है।

किन राज्यों को मिला फायदा

इस वित्तीय सहायता का लाभ तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मिजोरम और मेघालय को मिला है। यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास योजनाओं को लागू करने में मदद करेगी।

तेलंगाना और उत्तराखंड को मिली पहली किस्त

तेलंगाना को 247.94 करोड़ रुपए की अनटाइड ग्रांट जारी की गई है, जिससे राज्य की 12,600 ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं उत्तराखंड को 91.31 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त दी गई है, जिससे जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा रुकी हुई राशि भी जारी कर दी गई है, जिससे अतिरिक्त पंचायतों को भी फायदा पहुंचेगा।

राजस्थान और मेघालय में विकास को बल

राजस्थान को 315.61 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त जारी की गई है। इससे राज्य की जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को मजबूती मिलेगी। वहीं मेघालय को स्वायत्त जिला परिषदों और ग्राम परिषदों के लिए कुल मिलाकर करीब 49 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि दी गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन को और सशक्त बनाया जा सकेगा।

महाराष्ट्र को कई मदों में बड़ी सहायता

महाराष्ट्र को अलग-अलग मदों में बड़ी रकम जारी की गई है। इसमें टाइड और अनटाइड ग्रांट की कई किस्तें शामिल हैं। इस राशि से जिला और ब्लॉक पंचायतों के साथ हजारों ग्राम पंचायतों को फायदा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।

क्या है इस फंड का उद्देश्य

15वां वित्त आयोग के तहत जारी यह फंड ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वच्छता, जल प्रबंधन, सड़क निर्माण और अन्य आवश्यक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है। इससे स्थानीय निकायों को अपनी जरूरतों के हिसाब से योजनाएं लागू करने की स्वतंत्रता भी मिलती है।

जमीनी स्तर पर दिखेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वित्तीय मदद से गांवों में विकास की रफ्तार तेज होगी और स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
निष्कर्ष केंद्र सरकार का यह कदम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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