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मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल, रीवा में मेगा जल योजना से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर


भोपाल। मध्यप्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी दिशा में रीवा संभाग में एक महत्वाकांक्षी जल प्रदाय योजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत लगभग 2319.43 करोड़ रुपये की लागत से रीवा समूह जल प्रदाय परियोजना विकसित की जा रही है। इस परियोजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश जल निगम की परियोजना इकाई द्वारा किया जा रहा है, जिसमें अब एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।

परियोजना के अंतर्गत जल शोधन संयंत्र तक रॉ वाटर सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया है, जिससे अब अगले चरणों में तेजी आने की संभावना है। यह किसी भी जल योजना के लिए एक अहम पड़ाव माना जाता है, क्योंकि इसके बाद पानी के शोधन और वितरण का कार्य तेज गति से किया जा सकता है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके के मार्गदर्शन में इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। योजना के तहत रीवा जिले के 677 गांवों और मऊगंज जिले के 936 गांवों को जोड़ा जा रहा है। इस प्रकार कुल 1613 गांवों को इस परियोजना से लाभ मिलेगा।

योजना के पूर्ण होने पर लगभग 1.29 लाख ग्रामीण परिवारों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही जल संकट की समस्या का समाधान संभव होगा, जहां लोग अब तक स्वच्छ पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे।

इस परियोजना में केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक जल शोधन संयंत्रों और मजबूत वितरण नेटवर्क के माध्यम से घर-घर तक नल के जरिए पानी पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी जल योजनाएं ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। स्वच्छ पेयजल मिलने से न केवल लोगों की दैनिक जीवनशैली सुधरती है, बल्कि जल जनित बीमारियों में भी कमी आती है।

सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर ग्रामीण घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचे और लोगों को पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना न पड़े। रीवा संभाग की यह योजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में विकास और स्वास्थ्य के नए मानक स्थापित कर सकती है।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल जल संकट से राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन स्तर में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। यह योजना प्रदेश में जल प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं के विकास का एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आ रही है।

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