जानकारी के अनुसार वनतारा की विशेषज्ञ टीम पहले ही उज्जैन का दौरा कर प्रारंभिक सर्वे कर चुकी है। अब परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर काम किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट शहर के मक्सी रोड क्षेत्र के नौलखी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जहां इसके लिए 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित की गई है।
प्रस्तावित वनतारा प्रोजेक्ट में केवल एक सामान्य चिड़ियाघर ही नहीं बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण, उपचार और पुनर्वास के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। यहां घायल या संकटग्रस्त वन्यजीवों का इलाज और देखभाल की जाएगी। साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों और संभागों से रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को यहां सुरक्षित रखा जा सकेगा।
परियोजना को पर्यटन के लिहाज से भी बेहद आकर्षक बनाया जाएगा। यहां टाइगर सफारी, जंगल सफारी, नाइट कैंपिंग और प्रकृति से जुड़े कई एडवेंचर एक्टिविटी विकसित की जाएंगी। पर्यटक दिन और रात दोनों समय जंगल सफारी का अनुभव ले सकेंगे, जो इस परियोजना की खास विशेषता होगी। इससे उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिलेगा।
सरकार की योजना है कि इस प्रोजेक्ट के पहले चरण को सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 से पहले पूरा कर लिया जाए, ताकि उस समय उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इस नए पर्यटन स्थल का लाभ उठा सकें। शुरुआती चरण में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को विकसित किया जाएगा। इसमें 300 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के वन्यजीवों को रखने की व्यवस्था की जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से उज्जैन की पहचान केवल धार्मिक नगरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक प्रमुख पर्यटन और वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्यटन उद्योग को भी नया बढ़ावा मिलेगा। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध उज्जैन में इस तरह की आधुनिक पर्यटन परियोजना विकसित होने से शहर के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।