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Damoh Incident : दमोह मामले पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, एसपी को कार्रवाई के आदेश

Damoh Incident : दमोह मामले पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

Damoh Incident : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह जिले के एक ओबीसी व्यक्ति को पैर धोकर पानी पीने पर मजबूर करने की घटना पर खुद ही नोटिस लिया। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कहा कि देश में जाति आधारित नफरत की घटनाएं तेज हो रही हैं। हर जाति अपनी पहचान को लेकर इतनी सतर्क हो गई है कि हिंसा बढ़ रही है।

हिंदू समाज को खतरा :

कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने और हरियाणा में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की खुदकुशी जैसे मामलों का जिक्र किया। बेंच ने टिप्पणी की कि लोग ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र कहकर एक-दूसरे से झगड़ रहे हैं, इससे हिंदू समाज को खतरा हो सकता है।

तुरंत एनएसए लगाएं :

दमोह के एसपी को निर्देश दिए गए कि आरोपियों पर बीएनएस की धारा 351 और 133 के तहत केस दर्ज करें। वीडियो में दिखे सभी लोगों पर तुरंत एनएसए लगाएं, जिन्होंने पीड़ित को यह काम करने को कहा। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

क्या है मामला :

यह मामला दमोह के सतरिया गांव का है। अन्नू पांडे पर शराबबंदी के बावजूद शराब बेचने का आरोप लगा। पंचायत ने जुर्माना ठोका। ओबीसी समुदाय के पुरुषोत्तम कुशवाहा ने एआई से अन्नू के गले में जूतों की माला वाला मीम बनाया। सामान्य वर्ग वालों ने विरोध किया, तो मीम हटा लिया। पंचायत ने फैसला लिया कि पुरुषोत्तम को प्रायश्चित करना पड़ेगा। मंदिर में बुलाकर भीड़ ने अन्नू के पैर धोवाए और पानी पिलाया। वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया।

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