रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की बुनियादी सुविधाएं अब उनकी सरकार की प्राथमिकता हैं। अब दिल्ली को बहाने नहीं, परिणाम चाहिए। अब हेडलाइन्स नहीं, गाइडलाइन्स के साथ काम होगा और हर नागरिक को उसका अधिकार दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। यह बयान प्रशासनिक बदलाव और तेज कामकाज का संकेत देता है।
इस बजट की सबसे बड़ी खासियत पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर है। सीएम ने कहा, दिल्ली के सर्वांगीण विकास के लिए इस बार पूंजीगत खर्च पर अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटन किया गया है। उनका कहना है कि यह बजट केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में काम आएगा।
सीएम ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधते हुए बताया कि दिल्ली पर ₹47,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज छोड़ा गया, जिसमें ₹27,547 करोड़ अब भी बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया, PWD के एक प्रोजेक्ट में बिना काम हुए ₹250 करोड़ का भुगतान कर दिया गया, जो गंभीर अनियमितता को दिखाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार खिलाड़ियों, EWS वर्ग, स्कॉलरशिप, अवॉर्ड्स और किशोरी योजना से जुड़े लंबित भुगतान को साफ कर रही है।
बजट में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया गया है। सीएम ने बताया कि मुनक नहर के साथ ₹5,000 करोड़ की एलिवेटेड रोड बनाई जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम में राहत मिलेगी। इसके अलावा मेट्रो विस्तार, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ट्रांजिशन और सड़कों के बड़े निर्माण पर भी जोर दिया गया है।
ग्रीन और एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार भी इस बजट का अहम हिस्सा हैं। दिल्ली में पहली बार 4,200 हेक्टेयर रिज एरिया को फॉरेस्ट लैंड घोषित किया गया है और अगले चार साल में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासनिक सुधारों के तहत लाइसेंस प्रक्रिया आसान होगी, फायर NOC डिजिटल किया जाएगा और 1.5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज को बिजली कनेक्शन देने की योजना है।
इस बजट के साथ सीएम रेखा गुप्ता ने यह साफ कर दिया कि अब बहाने नहीं, सिर्फ परिणाम होंगे। जमीनी बदलाव, बुनियादी सुविधाओं की तेजी और प्रशासनिक सुधार दिल्ली के नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाएंगे और राजधानी के विकास की दिशा को नई गति देंगे।