ED Action : भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सहारा इंडिया समूह के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव (ओपी श्रीवास्तव) को 1.79 लाख करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में गिरफ्तार कर लिया। कोलकाता ED कार्यालय में घंटों चली पूछताछ के दौरान श्रीवास्तव के असंतोषजनक जवाबों पर कार्रवाई हुई। यह गिरफ्तारी समूह के प्रमुख सूत्रधारों में शुमार श्रीवास्तव की भूमिका को उजागर करती है, जो सुब्रत रॉय के निधन के बाद भी संपत्तियों का कथित गैरकानूनी निपटान कर रहे थे। ED का दावा है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को शेल कंपनियों के जरिए हेरफेर किया गया, जिससे लाखों लोगों का नुकसान हुआ।
गिरफ्तारी के बाद श्रीवास्तव को रिमांड पर लिया जाएगा, जहां से घोटाले की गहराई खुलने की उम्मीद है। समूह पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निवेशकों को रिफंड लौटाने का दबाव था, लेकिन संपत्ति बिक्री में अनियमितताओं ने मामला उलझा दिया। ED ने 707 एकड़ जमीन जब्त की थी, जिसमें श्रीवास्तव का नाम प्रमुखता से उभरा।
कौड़ियों के दाम बिकीं करोड़ों की जमीनें
यह कार्रवाई मध्य प्रदेश को विशेष रूप से झकझोर रही है, जहां सहारा की मूल्यवान संपत्तियों को अंडरवैल्यू बेचने के पुराने आरोप फिर से गरम हो गए हैं। EOW की शिकायत के मुताबिक, श्रीवास्तव ने सिमांतो रॉय और जेबी रॉय के साथ मिलकर 312 एकड़ से ज्यादा जमीन (बाजार मूल्य 1000 करोड़ से ऊपर) को महज 79.66 करोड़ में विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों को सौंप दिया। भोपाल के ग्यारह मील (मक्सी ग्राम) की 110 एकड़ जमीन, जिसका सुप्रीम कोर्ट मूल्यांकन 125 करोड़ था, 10 साल बाद 47 करोड़ में बिकी। सागर की 99 एकड़, कटनी-जबलपुर की 100-100 एकड़, और ग्वालियर की 100 एकड़ (100 करोड़ कीमत) को 18.60 करोड़ में हस्तांतरित किया गया।
इन सौदों से मिले 62.50 करोड़ रुपये SEBI-सहारा रिफंड अकाउंट में जमा करने की बजाय शेल कंपनियों में डायवर्ट कर दिए गए। कटनी और जबलपुर में नेशनल हाईवे की जमीनें भी मार्केट रेट से नीचे बिकीं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इन लेन-देन से समूह को अरबों का चूना लगा, जबकि खरीदारों को फायदा हुआ। EOW ने फरवरी 2025 में FIR दर्ज की, जिसमें श्रीवास्तव की भूमिका मुख्य बताई गई।
राज्य सरकार पर सवाल: MP में गिरफ्तारी क्यों नहीं?
ED की कार्रवाई के बाद MP सरकार की जांच पर उंगलियां उठने लगी हैं। राज्य स्तर पर सहारा घोटाले की प्रॉब की जा रही थी, लेकिन श्रीवास्तव को कोलकाता से क्यों पकड़ा गया? निवेशक संगठनों ने मांग की है कि MP में जब्त 707 एकड़ जमीन की दोबारा वैल्यूएशन हो और बिक्री रद्द की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने समूह को रिफंड लौटाने का आदेश दिया था, लेकिन अनियमितताओं ने निवेशकों को परेशान कर दिया।