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निवेशकों में डर, निफ्टी 24,900 के आसपास, रियल्टी और ऑटो शेयरों में भारी गिरावट


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। आज के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक गिरकर लगभग 80,000 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी 50 में लगभग 300 अंकों की गिरावट के साथ यह 24,900 के आसपास पहुंच गया। व्यापक बिकवाली का दबाव मुख्य रूप से रियल्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों पर देखा गया।

विश्लेषकों के अनुसार इस गिरावट का प्रमुख कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 10 प्रतिशत उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर सीधे पड़ेगा और कंपनियों की परिचालन लागत में वृद्धि होगी।

ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर आया। सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से वायदा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम लंबे समय तक बने रहने पर निवेशकों का रुख कीमती धातुओं की ओर बढ़ सकता है।

वैश्विक संकेत भी कमजोर बने रहे। एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा गया, जबकि अमेरिकी बाजारों ने पिछले सत्र में मिश्रित रुख अपनाया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता उभरते बाजारों पर भी प्रभाव डालती है, जिससे विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित होता है। हाल के आंकड़े भी इस दबाव की पुष्टि करते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी कर गिरावट को सीमित करने का प्रयास किया।

क्षेत्रीय स्तर पर ऑटो, ऊर्जा और बैंकिंग शेयरों में गिरावट से व्यापक बाजार भावना प्रभावित हुई। उच्च ईंधन लागत से कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ने की आशंका निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, तेल की कीमतों और निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी।

यदि वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशक वर्तमान में सतर्क हैं और बाजार के हर संकेत को ध्यान से देख रहे हैं। रियल्टी और ऑटो शेयरों में बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

इसलिए इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए ध्यान देने वाली मुख्य बातें वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेश प्रवाह में बदलाव रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल कीमतों में स्थिरता आती है और क्षेत्रीय तनाव कम होता है, तो बाजार में आंशिक सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

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