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तुलसी नगर में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर का भव्य ध्वजा महोत्सव: श्रद्धालुओं ने अभिषेक और भव्य वरघोड़े से मनाई आस्था की अनूठी धूम


नई दिल्ली। राजधानी के तुलसी नगर में स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर में दो दिवसीय ध्वजा महोत्सव का भव्य आयोजन शनिवार और शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे और भगवान पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत अनुभव किया। मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक आनंद से गूंज उठा। मंदिर समिति के अध्यक्ष आईएल मेहता ने बताया कि इस अवसर पर सभी धार्मिक अनुष्ठानों और विधियों को बड़े श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न कराया गया।

इस ध्वजा महोत्सव में विशेष रूप से आचार्य मुक्ति सागर सूरीश्वर महाराज और आचार्य अचल मुक्ति सागर महाराज ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भक्तों को धर्म, भक्ति और संयम की सीख दी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था बनाए रखने और धार्मिक कृत्यों में भाग लेने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर मंदिर की मूलनायक प्रतिमा शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के अभिषेक का सौभाग्य तुलसी नगर मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कोठारी और उनके परिवार को प्राप्त हुआ। यह पल न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जैन समाज के लिए गौरव का अवसर बना।

ध्वजा महोत्सव के पहले दिन, शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर में विविध धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। अभिषेक, पूजन, प्रार्थना और भजन कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। मंदिर में भक्ति और उल्लास का माहौल पूरे दिन बना रहा। इस दौरान चेंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री ललित तातेड, श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड, मनोज संघवी, शिल्पा कोठारी सहित जैन समाज के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

महत्वपूर्ण बात यह है कि महोत्सव का दूसरा दिन शनिवार 7 मार्च को सुबह 8 बजे प्रारंभ होगा। इस दिन आचार्य संघ के मार्गदर्शन में ध्वजाओं का भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। इस भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति में डूबेंगे। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि जैन समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करता है।

ध्वजा महोत्सव के माध्यम से मंदिर समिति ने यह संदेश दिया कि भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा के साथ किए गए धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाते हैं। तुलसी नगर का यह आयोजन जैन धर्म के इतिहास और परंपरा का प्रतीक बनकर उभरा है। महोत्सव ने लोगों को न केवल भगवान के प्रति आस्था बढ़ाने का अवसर दिया, बल्कि समाज में मेलजोल, सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवित रखा।

इस प्रकार, शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में ध्वजा महोत्सव ने भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जो आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहेगा।

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