शिक्षाविदों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कठिनाइयाँ
स्वास्थ्य कर्मियों को अपनी अजीबो-गरीब स्थिति का खुलासा करना पड़ता है, जबकि अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। स्थिर क्यूआर-बेस्ड फ़्यूल राशनिंग मशीनरी नहीं है; हॉस्पिटल आने-जाने के लिए भी ये पार्ट कम है।फुल की कमी और लॉन्ग वर्क में समय गंवाना की देखभाल पर असर पड़ रहा है।कुछ डॉक्टर और विशेषज्ञ पर कोई काम नहीं हो रहा है, जिससे विशेषज्ञ सेवा प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य सेवा को बनाए रखने के उपकरण
चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि हॉस्पिटल, कांस्टेबिल, मॉल में रहना, इसके लिए ईंधन की आपूर्ति एवं उपकरण में सुधार आवश्यक है। जी आइडियोए (इंटरनेटमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन) ने कहा कि वह घोड़ों पर नजर रख रही है और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आगे के कदम उठाने की घोषणा की है।
सरकार के कदम और प्रतिक्रिया
श्रीलंका सरकार ने जलेबी संकट को देखते हुए कुछ कदम उठाए हैं:
रविवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया।
पेट्रोल-डीज़ल की राशनिंग लागू।
क्यूआर-आधारित प्लांट सप्लाई शुरू।
हालांकि मेडिकल कम्यूनिटी इन पेशेवरों का विरोध जारी है, क्योंकि कई स्वास्थ्य कर्मी लंबी दूरी तय करके काम पर आ रहे हैं और राशनिंग के लिए अपनी समस्याएं बढ़ा रहे हैं।
श्रीलंका में ईंधन संकट के कारण अगले 48 घंटों में बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि जल्द ही उपाय नहीं किया गया, तो देश के हॉस्पिटल सिस्टम पर भारी असर और मरीजों की देखभाल बाधित हो सकती है। विशेषज्ञ का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधा और सतत ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना इस संकट का मूल समाधान है।