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देवताओं की होली रंग पंचमी कल जानें तिथि पूजा विधि और भगवान को किस रंग का गुलाल चढ़ाना होता है शुभ


नई दिल्ली। हिंदू धर्म में होली के बाद आने वाला रंग पंचमी का पर्व बेहद खास और आध्यात्मिक महत्व वाला माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को अबीर गुलाल अर्पित करने की परंपरा है इसलिए इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है और भगवान को रंग अर्पित कर भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी देवताओं को अबीर गुलाल चढ़ाने से कुंडली के दोष कम होते हैं और जीवन में सुख समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार रंग पंचमी का पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 8 मार्च को रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। पंचमी तिथि उदया तिथि के अनुसार 8 मार्च को पड़ रही है इसलिए इस वर्ष रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन कई स्थानों पर धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा होती है और कई जगह भव्य शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं। ढोल नगाड़ों की गूंज और भक्ति संगीत के साथ पूरा वातावरण उत्सवमय हो जाता है।

रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विधि विधान के साथ पूजा करने से घर परिवार में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर एक चौकी रखकर उस पर राधा कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराया जाता है और उन्हें फूल माला तथा फल अर्पित कर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद श्रद्धा भाव से भगवान को अबीर गुलाल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान दीपक और धूप जलाकर मंत्रों का जाप किया जाता है और अंत में भगवान की आरती उतारी जाती है तथा प्रसाद का वितरण किया जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में रंग पंचमी के दिन अलग अलग रंग के गुलाल का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि अलग अलग रंग जीवन के अलग अलग क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। लाल रंग को ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है और इसे सूर्य तथा मंगल से जुड़ा हुआ रंग बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति के कामों में बाधा आ रही हो या आत्मविश्वास में कमी महसूस हो रही हो तो भगवान को लाल रंग का गुलाल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

पीला रंग शुभता और मंगल कार्यों से जुड़ा माना जाता है और इसे देवगुरु बृहस्पति का रंग कहा जाता है। यदि विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों में रुकावट आ रही हो या संतान की शिक्षा में परेशानी हो तो भगवान को पीले रंग का गुलाल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।

हरा रंग समृद्धि शांति और संतुलन का प्रतीक माना जाता है और ज्योतिष के अनुसार इसका संबंध बुध ग्रह से होता है। यदि वाणी और बुद्धि में असंतुलन के कारण जीवन में समस्याएं आ रही हों तो रंग पंचमी के दिन भगवान को हरे रंग का गुलाल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

वहीं नीले रंग को वास्तु और ज्योतिष दोनों में विशेष महत्व दिया गया है। यह रंग सुरक्षा सत्य और गहराई का प्रतीक माना जाता है और इसे शनि ग्रह से जोड़ा जाता है। जीवन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए भगवान को नीले रंग का गुलाल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।

इस तरह रंग पंचमी केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

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