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पश्चिम एशिया तनाव पर IEA प्रमुख की चेतावनी, बोले-‘वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा’


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। International Energy Agency (आईईए) के प्रमुख Fatih Birol ने साफ कहा है कि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। Iran, United States और Israel के बीच जारी टकराव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में साफ दिखने लगा है। ऑस्ट्रेलिया में एक कार्यक्रम के दौरान बिरोल ने कहा कि दुनिया इस समय एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है और अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो कोई भी देश इसके प्रभाव से बच नहीं पाएगा।

होर्मुज स्ट्रेट बना संकट की जड़, तेल सप्लाई पर असर

इस पूरे संकट का सबसे बड़ा केंद्र Strait of Hormuz है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। दुनिया भर में खपत होने वाले करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है और रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल यहां से गुजरता है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग से शिपिंग प्रभावित हुई है, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में अस्थिरता बढ़ गई है। हालांकि ईरान ने दावा किया है कि स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है और नेविगेशन जारी है, लेकिन जमीनी हालात निवेशकों और देशों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने के संकेत

तेल सप्लाई में रुकावट का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और रोजमर्रा की चीजों की लागत बढ़ जाती है। बिरोल ने इसे ग्लोबल ऑयल मार्केट के इतिहास की सबसे बड़ी सप्लाई बाधाओं में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो ऊर्जा संकट गहरा सकता है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ सकती हैं।

कोई देश नहीं बचेगा असर से

आईईए प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि यह संकट किसी एक या दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर विकसित और विकासशील-दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां महंगाई और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।

IEA की सलाह: ऊर्जा बचत ही समाधान

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईईए ने सरकारों, कंपनियों और आम लोगों के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं। इसमें जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाना, अनावश्यक हवाई यात्रा से बचना और ईंधन की खपत कम करना शामिल है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कुकिंग और अन्य आधुनिक विकल्पों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि एलपीजी और तेल पर निर्भरता कम की जा सके।

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