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यूपीआई के 10 साल पूरे: लेनदेन की वॉल्यूम 12,000 गुना बढ़ी; वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी


नई दिल्ली। भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) ने 11 अप्रैल को अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस एक दशक में यूपीआई ने देश में लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, इसकी लेनदेन वॉल्यूम में 12,000 गुना से ज्यादा और वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

2017 से 2026 तक का सफर: जबरदस्त ग्रोथ

एनालिटिक्स फर्म Tracxn के अनुसार,

वित्त वर्ष 2017: 1.786 करोड़ ट्रांजैक्शन, 6,952 करोड़ रुपए वैल्यू
वित्त वर्ष 2026: 218.98 अरब ट्रांजैक्शन, 285 लाख करोड़ रुपए वैल्यू

यह आंकड़े दिखाते हैं कि यूपीआई ने बेहद कम समय में अभूतपूर्व विस्तार किया है।

महामारी के दौरान मिली सबसे बड़ी रफ्तार

शुरुआती वर्षों में धीमी बढ़त के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान यूपीआई ने तेजी से रफ्तार पकड़ी:

FY21: 22.33 अरब ट्रांजैक्शन
FY22: 45.97 अरब
FY23: 83.75 अरब

इसके बाद भी ग्रोथ जारी रही और FY24 में 130.13 अरब और FY25 में 185.87 अरब लेनदेन दर्ज किए गए।

मार्च 2026 में बना नया रिकॉर्ड

National Payments Corporation of India (NPCI) के अनुसार, मार्च 2026 में यूपीआई ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया:

22.64 अरब ट्रांजैक्शन (फरवरी: 20.39 अरब)
सालाना आधार पर 24% की बढ़त

इसने जनवरी 2026 के 21.70 अरब के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

डिजिटल इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार

यूपीआई की सफलता का एक बड़ा कारण इसका तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर भी है:

यूपीआई QR कोड: 73.13 करोड़ (15% वृद्धि)
पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल: 1.148 करोड़ (15% वृद्धि)

इससे छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है।

क्यों खास है यूपीआई?

UPI (Unified Payments Interface) ने भारत में:

कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दिया
छोटे व्यापारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा
आम लोगों के लिए आसान और तेज पेमेंट सिस्टम उपलब्ध कराया
निष्कर्ष

10 साल में यूपीआई ने भारत को डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बना दिया है। इसकी तेजी से बढ़ती पहुंच और उपयोग भविष्य में भी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।

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