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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मार्च तक लग सकती है मुहर, जल्‍द यूएस जाएगी भारतीय टीम


नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को कानूनी रूप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन अगले हफ्ते अमेरिका जाने वाले हैं। उनका मकसद 7 फरवरी को जारी हुए संयुक्त बयान के आधार पर समझौते का कानूनी मसौदा फाइनल करना है।

रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर लगाए गए 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की तैयारी में है। उम्मीद है कि यह कटौती इसी हफ्ते लागू हो सकती है। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त से पहले लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ, जो रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण थे, अब हटा दिए गए हैं। नई कटौती पर प्रक्रिया जारी है, और अगर किसी वजह से देरी होती है तो भारतीय टीम अमेरिका जाकर इसे फाइनल करेगी।

कानूनी समझौते की तैयारी
7 फरवरी को जो संयुक्त बयान जारी हुआ था, वह असल में इस फ्रेमवर्क डील का हिस्सा था। उस बयान में समझौते की रूपरेखा तय की गई थी। अब उसी रूपरेखा को कानूनी दस्तावेज में बदलकर दोनों देशों की ओर से हस्ताक्षर किए जाएंगे। दर्पण जैन अगली हफ्ते अपनी टीम के साथ अमेरिका जाएंगे ताकि समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा सके। कोशिश है कि मार्च तक समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएं, हालांकि कुछ कानूनी मुद्दे अभी भी सुलझाए जाने हैं।

जीरो टैरिफ और बाजार तक पहुंच

राजेश अग्रवाल ने कहा कि कुछ सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ पूरी तरह खत्म (जीरो) किया जा सकता है। लेकिन यह तभी लागू होगा जब दोनों देशों के बीच कानूनी समझौते पर साइन हो जाएगा। भारत की तरफ से भी टैरिफ में कटौती या बाजार में रियायत केवल समझौते के आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद ही संभव होगी।

7 फरवरी का संयुक्त बयान
7 फरवरी को जारी बयान में कहा गया था कि अमेरिकी टैरिफ भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाएंगे। साथ ही कुछ उत्पादों पर जीरो ड्यूटी, बाजार खोलने के कदम और दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की बात कही गई। यह समझौता लगभग एक साल लंबी बातचीत के बाद संभव हुआ।

ऐतिहासिक कदम: पीयूष गोयल

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक और संतुलित समझौता बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार में भारतीय निर्यात के लिए नए दरवाजे खुलेंगे। इससे छोटे और मझोले उद्योग, किसान, मछुआरे, युवा, महिलाएं और देश के हुनरमंद लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा।

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