Mahakaushal Times

रिटायरमेंट से पहले जजों का ‘लास्ट ओवर में छक्के मारना’ दुर्भाग्यपूर्ण – MP के जज की याचिका पर SC की टिप्पणी

Supreme Court

जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को न्यायपालिका में भ्रष्ट आचरण पर तीखी टिप्पणी की है। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच (जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली के साथ) ने कहा कि कुछ जजों में रिटायरमेंट से चंद दिन पहले ताबड़तोड़ फैसले सुनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। “वे ऐसे आदेश पारित करते हैं जैसे क्रिकेट मैच के अंतिम ओवर में छक्के मार रहे हों। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

यह टिप्पणी मध्यप्रदेश के एक प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की याचिका पर आई। जज को रिटायरमेंट से 10 दिन पहले (19 नवंबर 2025) सस्पेंड कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने दो संदिग्ध आदेश पारित किए। जज ने इसे हाईकोर्ट के फुल कोर्ट फैसले के रूप में चुनौती दी थी।

जज की दलील

सीनियर एडवोकेट विपिन सांघी ने कहा कि जज का करियर बेदाग रहा, सालाना रिपोर्टों में हाई रेटिंग मिली। संदिग्ध आदेशों को अपील से सुधारा जा सकता था, सस्पेंड करने की जरूरत नहीं थी। जज का रिटायरमेंट 30 नवंबर 2025 को था, लेकिन MP में उम्र 62 साल होने से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब 30 नवंबर 2026 को रिटायर होंगे।

CJI का जवाब

CJI ने कहा, “जब उन्होंने छक्के लगाने शुरू किए, तब उन्हें पता नहीं था कि रिटायरमेंट की उम्र बढ़ेगी। यह मैसेज जाना चाहिए।” बेंच ने पूछा कि सस्पेंशन को पहले हाईकोर्ट में क्यों नहीं चुनौती दी? RTI से जानकारी मांगने पर भी आपत्ति जताई – “एक सीनियर जज से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती।”

कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और मामला हाईकोर्ट भेजा। हाईकोर्ट को 4 हफ्ते में सस्पेंशन पर फैसला करने का निर्देश दिया। जज को हाईकोर्ट में प्रतिनिधित्व देने की छूट दी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर