जबलपुर/कटनी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक एक नए कानूनी विवाद में फंस गए हैं। जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) ने बुधवार को सुनवाई करते हुए पाठक को नोटिस जारी किया है और उन्हें दो सप्ताह (16 दिसंबर तक) के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर अब्दुल रज्जाक द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। रज्जाक ने अपनी याचिका में विधायक संजय पाठक पर राजनीतिक और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता के चलते उन्हें फर्जी मामलों में फंसाने और लगातार परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया है।
हाईकोर्ट ने औपचारिक पक्षकार बनाने की दी अनुमति
अब्दुल रज्जाक की ओर से याचिका में दावा किया गया है कि विधायक संजय पाठक (BJP MLA Sanjay Pathak) ने अपने राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक दबाव का इस्तेमाल कर पुलिस को निर्देश दिए, जिसके कारण रज्जाक को बार-बार गिरफ्तार किया गया और खनन कारोबार से दूर रखने के लिए लगातार उत्पीड़न किया गया।
याचिका पर गंभीर रुख अपनाते हुए कोर्ट ने संजय पाठक को इस मामले में औपचारिक पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी और उन्हें नोटिस जारी किया।
अगस्त 2021 से जेल में होने पर भी नए केस!
याचिकाकर्ताओं (रज्जाक के वकीलों) ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक प्रतिशोध के चलते लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने दलील दी कि रज्जाक के खिलाफ दर्ज कई मामलों में अभी तक अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) दाखिल नहीं की गई है, और जैसे ही उसे किसी एक केस में जमानत मिलती है, उसे तुरंत दूसरे मामले में गिरफ्तार दिखा दिया जाता है।
कोर्ट ने इस पर प्रशासन से भी स्पष्टीकरण मांगा है कि जब रज्जाक अगस्त 2021 से जेल में बंद है, तो इसी अवधि में उसके खिलाफ नए आपराधिक मामले कैसे दर्ज हो गए।
जस्टिस की टिप्पणी से न्यायिक गलियारों में हलचल
इस मामले से जुड़ा एक और विवाद उस समय सामने आया, जब हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने एक अन्य याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने अपने आदेश (1 सितंबर के) में यह टिप्पणी दर्ज की थी कि विधायक संजय पाठक ने उनसे खनन कंपनियों से जुड़े मामले पर निजी तौर पर चर्चा करने की कोशिश की थी।
इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित की गई है, जिसने राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है।