Jabalpur News : जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (MPPTCL) के एक विशाल टेंडर में धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में पता चला कि जबलपुर की कैलाश देव बिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने नकली दस्तावेज दिखाकर 226 करोड़ रुपये का ठेका हथिया लिया। यह ठेका 220 केवी के दो सब-स्टेशनों और विंड फार्म पुलिंग सब-स्टेशन के निर्माण से जुड़ा था।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा? (Jabalpur News)
कंपनी को बड़े प्रोजेक्ट के लिए पूर्व अनुभव का प्रमाण देना पड़ता है। इसी के लिए उन्होंने नोएडा की इनॉक्स विंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड का कथित परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट जमा किया, जिसमें दावा था कि कंपनी ने पहले भी ऐसे बड़े काम सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। लेकिन EOW ने जब इनॉक्स विंड से संपर्क किया तो साफ हो गया कि यह सर्टिफिकेट पूरी तरह नकली है। कंपनी ने पुष्टि की कि उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज जारी ही नहीं किया।
इस फर्जी कागज के दम पर कंपनी ने अपनी क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और ठेका हासिल कर लिया। इससे न सिर्फ सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ, बल्कि बिजली प्रोजेक्टों की गुणवत्ता और समयसीमा भी खतरे में पड़ सकती थी।
कौन हैं आरोपी? (Jabalpur News)
EOW ने कंपनी के संचालकों – कैलाश शुक्ला, सीमा शुक्ला और भानु शुक्ला – के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (दस्तावेज जालसाजी) और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या टेंडर प्रक्रिया में कोई विभागीय अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल था।
प्रशासन का रुख (Jabalpur News)
MPPTCL ने तुरंत अपने सभी टेंडरों की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि दस्तावेजों की दोबारा जांच होगी ताकि भविष्य में ऐसी धांधली न हो। EOW का दावा है कि पूरी जांच में और खुलासे हो सकते हैं। संचालकों को पूछताछ के लिए समन भेजा गया है। यह मामला जबलपुर के बिजली क्षेत्र में हड़कंप मचा रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि फर्जी कंपनियां सरकारी ठेकों को हथियाने का खेल चल रहा है।