रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही मिशन को अब सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी EPC सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अब सिर्फ प्रोजेक्ट बनाने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सेवाएं भी देनी होंगी
इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण असर भुगतान व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। अभी कई राज्यों में कंपनियों को भुगतान मिलने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग जाता है, लेकिन सरकार ने इसे सुधारते हुए सितंबर 2026 तक भुगतान अवधि को घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य तय किया है। इससे सेक्टर में कैश फ्लो बेहतर होगा और कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत नल कनेक्शन देने की समयसीमा को भी 2024 से बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय गुणवत्ता और स्थायित्व पर ज्यादा ध्यान दिया जाए
रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन से पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली संगठित कंपनियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक, बेहतर सर्विस नेटवर्क और ऊर्जा दक्ष समाधान हैं, वे इस बदलाव का ज्यादा फायदा उठा पाएंगी
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2025-26 के बाद बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि योजना के क्रियान्वयन में अभी भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं। इसी कारण अब सरकार टिकाऊ और प्रभावी सेवा देने वाले मॉडल पर जोर दे रही है
गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंचाना था। अब तक इस योजना के तहत नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या में करीब पांच गुना वृद्धि हुई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है
फिर भी कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता और नियमित सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब इस योजना को अपग्रेड कर सेवा आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया है
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म के जरिए पानी की सप्लाई और गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि जल आपूर्ति को एक स्थायी और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके