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एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस धर्माधिकारी बने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, 24 साल की प्रैक्टिस के बाद मिला बड़ा पद


नई दिल्ली। मध्यप्रदेश न्यायिक जगत के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। Sushrut Arvind Dharmadhikari को Madras High Court का नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र के Ministry of Law and Justice (India) ने गुरुवार को उनकी नियुक्ति का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस नियुक्ति के साथ ही वे Madhya Pradesh High Court से अन्य राज्यों में चीफ जस्टिस बनने वाले 17वें न्यायाधीश बन गए हैं।

8 जुलाई 1966 को Raipur में जन्मे जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने वर्ष 1992 में अपने विधिक करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने करीब 24 वर्षों तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में वकालत की और इस दौरान सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों में सक्रिय रूप से पैरवी की। उनके लंबे अनुभव और कानूनी समझ के कारण उन्हें न्यायिक क्षेत्र में विशेष पहचान मिली।

वकालत के दौरान उन्होंने 2000 से 2015 तक केंद्र सरकार के लिए स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में भी काम किया।

इस दौरान उन्होंने Income Tax Department, Reserve Bank of India और Central Excise Department सहित कई सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का प्रतिनिधित्व किया।

बाद में उन्हें 7 अप्रैल 2016 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद 17 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि मिली। न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और न्यायिक व्यवस्था में अहम योगदान दिया।

चीफ जस्टिस बनने से पहले उनका तबादला 23 अप्रैल 2025 को Kerala High Court में किया गया था।

यह स्थानांतरण संविधान के अनुच्छेद 222 के तहत किया गया था, जिसकी मंजूरी भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति ने दी थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 20 मार्च, 24 मार्च और 3 अप्रैल 2025 को हुई बैठकों में उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी।

केरल हाईकोर्ट में कार्यरत रहते हुए जस्टिस धर्माधिकारी हाल ही में चर्चित फिल्म The Kerala Story 2: Goes Beyond से जुड़े मामले की सुनवाई में भी शामिल रहे। इस मामले में एकल न्यायाधीश द्वारा फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों की अस्थायी रोक लगाए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी।

जस्टिस धर्माधिकारी और P. V. Balakrishnan की खंडपीठ ने इस अपील पर लगभग दो घंटे तक सुनवाई करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बताया जा रहा है कि जस्टिस धर्माधिकारी की नियुक्ति Manindra Mohan Shrivastava के सेवानिवृत्त होने के दिन 5 मार्च को प्रभावी हुई है। उनकी नियुक्ति को न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और इससे मध्यप्रदेश न्यायिक व्यवस्था की प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

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