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कालाष्टमी व्रत 2026: ग्रहदोष शांत करने के असरदार उपाय


नई दिल्ली । कालाष्टमी हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है जिसे विशेष रूप से कालभैरव की उपासना के लिए मनाया जाता है। इस दिन शनि राहु और केतु से जुड़े ग्रहदोषों को शांत करने के लिए भक्त विशेष उपाय करते हैं। 2026 में वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल को रात 09:19 मिनट से शुरू होकर 10 अप्रैल को रात 11:15 मिनट तक रहेगी। इसलिए इस वर्ष कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल शुक्रवार को रखा जाएगा।

धर्मशास्त्रों के अनुसार कालभैरव की पूजा निशा काल में करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यह समय इसलिए शुभ है क्योंकि कालभैरव का जन्म रात्रि में हुआ था। रात के समय विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति जीवन में भय रोग और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त करता है और ग्रहों के क्रूर प्रभाव शांत होते हैं।

कालाष्टमी पर कई अचूक उपायों का पालन कर भक्त अपनी समस्याओं और बाधाओं से मुक्त हो सकते हैं। सबसे पहले इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ लगी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। यदि काला कुत्ता न मिले तो किसी भी कुत्ते को रोटी अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए शाम के समय कालभैरव मंदिर में जाकर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाना अत्यंत प्रभावशाली उपाय है। साथ ही 108 बार ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करने से कोर्ट-कचहरी और शत्रुओं की बाधाएं दूर होती हैं। शनि की महादशा यदि प्रभावी हो रही हो तो भैरव जी को शमी के पत्ते और काले तिल अर्पित करना चाहिए। इससे भगवान शिव और भैरव दोनों प्रसन्न होते हैं और आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है।

नींबू से जुड़ा उपाय भी इस दिन बड़ा कारगर माना गया है। कालभैरव को प्रसन्न करने के लिए नींबू अर्पित करने से कालसर्प दोष और ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। इसके अलावा विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में बाधाओं का नाश होता है और मनोबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

वैशाख माह की कालाष्टमी इस बार कई विशेष संयोगों के कारण अधिक महत्व रखती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन कुछ विशेष उपाय अपनाने से जातक को स्वास्थ्य शत्रु से मुक्ति और आर्थिक लाभ की प्राप्ति संभव होती है। इसलिए भक्तों को चाहिए कि वे इस दिन व्रत और पूजा का पालन पूरी श्रद्धा और विधि विधान से करें।

संक्षेप में कालाष्टमी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि जीवन में शांति सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला भी है। काले कुत्ते को रोटी खिलाना सरसों के तेल का दीपक जलाना शमी के पत्ते और काले तिल अर्पित करना और नींबू से उपाय करना इन सभी कर्मों से शनि राहु और केतु दोषों से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार कालाष्टमी व्रत व्यक्ति के जीवन में डर रोग और शत्रुओं से सुरक्षा की नींव रखता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर मार्गदर्शित करता है।

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