अदालत ने इस मामले में निचली अदालत से आरोपमुक्त किए गए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है। वहीं अदालत ने राउज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश के एक हिस्से पर रोक लगाने की बात कही है जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की गई थी। उच्च न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत के कुछ अवलोकन तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थे। हालांकि अदालत ने फिलहाल निचली अदालत के उस आदेश पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है जिसमें केजरीवाल सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया था। ऐसे में इस चरण में CBI को तत्काल राहत नहीं मिली है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह निचली अदालत को प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा धनशोधन मामले की जांच पर कार्यवाही को बाद की तारीख तक स्थगित करने का आदेश देगी। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा किए गए अनुरोध पर उच्च न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि वह सीबीआई अधिकारियों पर अधीनस्थ अदालत द्वारा की गई पूर्वग्रहपूर्ण टिप्पणियों के अमल पर रोक लगाएगी। मेहता ने अदालत से सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए समय निर्धारित करके अंतिम निर्णय लेने का आग्रह किया। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को अरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है।
शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक
बता दें कि निचली अदालत ने 27 फरवरी को केजरीवाल सिसोदिया और 21 अन्य को आरोप मुक्त कर दिया और सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से विफल रहा और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ। इस मामले में जिन 21 लोगों को क्लीन चिट दी गई है उनमें तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं। सीबीआई आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार द्वारा अब रद्द की जा चुकी शराब नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है।
हाईकोर्ट के फैसले पर आप का बयान