खरमास की अवधि में विवाह गृह प्रवेश मुंडन और नए व्यापार जैसी मांगलिक गतिविधियों पर रोक रहती है। पंडित चौबे बताते हैं कि इस समय पूजा पाठ दान और तप अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं। सूर्य जब गुरु की राशियों धनु या मीन में होते हैं तो उनका तेज और प्रभाव विवाह जैसे भौतिक सुखों वाले कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।
विवाह के लिए शुक्र और गुरु ग्रह का उदय और शुभ स्थिति जरूरी है। गुरु को कन्या की कुंडली में पति का कारक और शुक्र को वर की कुंडली में पत्नी और दाम्पत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। यदि ये ग्रह अस्त हों तो विवाह संपन्न नहीं किया जाता। इस वर्ष 28 फरवरी को शुक्र के मीन राशि में प्रवेश के बाद स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
विवाह के लिए शुभ नक्षत्र जैसे रोहिणी मृगशिरा और रेवती शुभ तिथि और अनुकूल लग्न का संयोग होना आवश्यक है। रविवार सोमवार बुधवार गुरुवार और शुक्रवार को विशेष रूप से विवाह के लिए अनुकूल दिन माने जाते हैं।
खरमास की समाप्ति 14 अप्रैल 2026 को होगी जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर मेष संक्रांति मनाएंगे। इसके तुरंत बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू किए जा सकते हैं। मिथिला पंचांग के अनुसार अप्रैल में 17 20 26 और 30 तारीखें और बनारसी पंचांग के अनुसार 15 16 20 21 25–30 अप्रैल की तिथियां विवाह के लिए अति शुभ हैं। मई माह में मिथिला पंचांग के अनुसार 1 6 8 10 और 13 मई और बनारसी पंचांग के अनुसार 1–8 12 और 13 मई को विवाह के विशेष योग बन रहे हैं।
ग्रीष्मकाल में भी शुभ संयोग मिलते हैं। जून में 19 24–26 28 और 29 जून और जुलाई में 1 2 3 6 9 12 मिथिला पंचांग और 1 2 6–8 11 12 बनारसी पंचांग को विवाह के लिए अनुकूल मुहूर्त हैं। इसके बाद देवशयनी एकादशी के आसपास से पुनः मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा।
पंडित चौबे कहते हैं कि जातकों को अपनी कुंडली के अनुसार स्थानीय विद्वान से सलाह लेकर ही लग्न तय करना चाहिए ताकि ग्रहों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो। इस प्रकार 15 मार्च से 14 अप्रैल 2026 तक खरमास रहेगा और इसके बाद अप्रैल मई के बीच विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कई श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं।