प्राण साहब ने एक पुराने इंटरव्यू में इस घटना को याद करते हुए बताया था कि किशोर कुमार के साथ सीरियस सीन शूट करना किसी चुनौती से कम नहीं था। उस दिन फाइट सीन के दौरान जैसे ही प्राण उनके करीब जाकर फिल्मी मुक्का मारते, किशोर कुमार दर्द का नाटक करने के बजाय जोर-जोर से हंसने लगते थे। एक के बाद एक लगभग 12 से 14 रीटेक हो चुके थे, लेकिन किशोर कुमार गंभीर होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। पूरी यूनिट परेशान थी और वक्त निकलता जा रहा था। आखिरकार, प्राण ने एक कड़ा फैसला लिया। अगले शॉट में जैसे ही कैमरा रोल हुआ, प्राण ने हवा में हाथ चलाने के बजाय सचमुच का एक जोरदार मुक्का किशोर कुमार के पेट में जड़ दिया। असली चोट लगते ही किशोर कुमार के मुंह से चीख निकल पड़ी और वे दर्द से दोहरे हो गए। प्राण ने तुरंत कहा, “बस, यही रिएक्शन तो हमें फिल्म के लिए चाहिए था!”
इस वाकये के बाद सीन तो परफेक्ट शूट हो गया, लेकिन किशोर कुमार की हालत कुछ देर के लिए खराब हो गई थी। प्राण ने मजाकिया लहजे में यह भी स्वीकार किया कि किशोर कुमार का व्यक्तित्व इतना संक्रामक था कि उनके साथ काम करते-करते एक गंभीर विलेन की छवि वाला इंसान भी उनकी तरह ही बन जाता था। प्राण ने कहा कि अगर वे एक-दो फिल्में और किशोर दा के साथ कर लेते, तो शायद वे भी उनके ‘क्लोन’ बन जाते और अपनी गंभीरता खो देते। यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बड़े चाव से सुनाया जाता है, जो यह दर्शाता है कि उस दौर के कलाकारों के बीच कितनी गहरी समझ और काम के प्रति कितना अनूठा समर्पण हुआ करता था। किशोर कुमार आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी ये शरारतें और प्राण साहब जैसे दिग्गजों के साथ उनके ये किस्से आज भी प्रशंसकों के चेहरों पर मुस्कान ले आते हैं।