भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने की वजह से कई लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं हुईं और कई की मौत भी हुई जिससे स्थानीय लोग और विपक्ष दोनों ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस विधायक स्थगन प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रखेंगे। इस मुद्दे पर विपक्ष ने पहले भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था और संसद में इसे गंभीर विषय के रूप में उठाया।
विपक्ष का आरोप है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति से बच्चों और बड़ों समेत अनेक लोगों को एक्यूट डायरिया जैसी बीमारी हुई जिसके चलते कम से कम 22 लोगों की मौत हुई है और कई दर्जन लोग अस्पताल में भर्ती रहे। कांग्रेस ने इसे सिस्टम की विफलता बताया और इसके लिए मंत्रियों की इस्तीफा की मांग भी की।
सांसदों ने कहा कि दूषित पानी मामले को विस आवाज़ में उठाने के लिए स्थगन प्रस्ताव जरूरी है ताकि पूरे मुद्दे पर विस्तार से बहस हो और जवाबदेही तय की जा सके। विपक्ष ने तर्क दिया कि सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया और पीड़ितों को दी गई मुआवजे की राशि अपर्याप्त है जबकि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
सरकार की ओर से जवाब में कहा गया है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। स्वास्थ्य और नगर प्रशासन विभागों ने घटनास्थल पर कार्यवाही की है और दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मामला राजनीति से ऊपर है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने सहित राहत कार्य किये जा रहे हैं।
सदन में इस मुद्दे को लेकर कई बार कार्यवाही स्थगित भी हुई क्योंकि विपक्ष ने इसे व्यापक रूप से उठाने की मांग की है। कांग्रेस ने दावा किया कि दूषित पानी से मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज़्यादा हो सकती है और सरकार की जवाबदेही तय किये बिना इस मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ा जाये।
राज्यसभा में नेताओं ने जोर देकर कहा है कि सदी में स्वच्छ भारत की बात करते हुए यदि नागरिकों को सुरक्षित पीने का पानी न मिल रहा हो तो यह गंभीर समस्या है जिसे जल्द ही नीति स्तर पर भी संबोधित किया जाना चाहिए। स्थगन प्रस्ताव पर आज होने वाली चर्चा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।