इसी कड़ी में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके साथ ही उज्जैन से इंदौर को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को सिक्स लेन में विकसित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य जारी है।
शहर की आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए भी व्यापक योजनाएं लागू की जा रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए यातायात पार्किंग सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।
सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों की समीक्षा के तहत संभाग आयुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने हरि फाटक ब्रिज क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एमपी आरडीसी द्वारा बनाए जा रहे फोरलेन ब्रिज के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अतिक्रमण हटाने निर्माण स्थल के चयन मशीनों की उपलब्धता और कार्य की गति को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिंहस्थ महापर्व के पहले सभी आवश्यक अधोसंरचनात्मक कार्य पूर्ण हो जाएं। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
सिंहस्थ महापर्व देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की आधारभूत संरचना को मजबूत करना और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।
अधिकारियों का मानना है कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से न केवल सिंहस्थ के दौरान व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि भविष्य में भी उज्जैन शहर को स्थायी रूप से बेहतर यातायात और सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
प्रशासन की इस सक्रियता से यह स्पष्ट है कि सिंहस्थ 2028 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए हर स्तर पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। महाकाल नगरी उज्जैन आने वाले समय में न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अधोसंरचना और सुविधाओं के मामले में भी एक नए स्वरूप में नजर आएगी।