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1968 का माई लाई नरसंहार: वियतनाम युद्ध की वह घटना जिसने दुनिया को झकझोर दिया

नई दिल्ली । वियतनाम युद्ध के दौरान 16 मार्च 1968 को दक्षिण वियतनाम के छोटे गांव My Lai में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए नरसंहार ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अमेरिकी सैनिकों को यह सूचना मिली थी कि गांव में वियतकांग विद्रोही छिपे हुए हैं। इसी आधार पर चार्ली कंपनी को तलाशी अभियान पर भेजा गया जिसका नेतृत्व विलियम कैलीकर रहे थे।

जब सैनिक गांव पहुंचे तो वहां कोई संगठित प्रतिरोध नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों समेत सैकड़ों निहत्थे नागरिकों को मार डाला। कई घरों को जला दिया गया और ग्रामीणों को समूहों में खड़ा कर गोली मारी गई। बाद में सामने आए आंकड़ों के अनुसार लगभग 500 नागरिक मारे गए।

शुरुआत में अमेरिकी सेना ने इस अभियान को सफल सैन्य कार्रवाई बताया। हालांकि कुछ सैनिकों और पत्रकारों की कोशिशों से धीरे धीरे सच्चाई सामने आई। विशेषकर अमेरिकी सैनिक ह्यू थॉम्पसन जूनियर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे हेलीकॉप्टर से इलाके का निरीक्षण कर रहे थे और निहत्थे नागरिकों पर हो रही गोलीबारी को देखकर हस्तक्षेप किया। उन्होंने कई ग्रामीणों को बचाने की कोशिश भी की।

1969 में अमेरिकी पत्रकार सीमोर हर्षकी रिपोर्ट के बाद माई लाई नरसंहार वैश्विक सुर्खियों में आया। अमेरिका में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और वियतनाम युद्ध के खिलाफ जनता की नाराजगी बढ़ी।जांच के बाद कई सैनिकों पर मुकदमा चला लेकिन केवल विलियम कैली को दोषी ठहराया गया। उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई हालांकि बाद में यह सजा कम कर दी गई और वे कुछ वर्षों में रिहा हो गए। माई लाई नरसंहार न केवल युद्ध अपराध के प्रतीक के रूप में इतिहास में दर्ज है बल्कि यह उस दौर के मानवाधिकार संकट और युद्ध की क्रूरता को भी उजागर करता है।

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