विवादित स्थल और संरक्षण कार्य
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला विशेष रूप से मोहरा मोरादू और सरकैप से जुड़ा है। इन स्थलों पर मरम्मत और पुनर्निर्माण के दौरान मूल संरचनाओं में बदलाव, दीवारों को ऊंचा करना और सीमेंट का उपयोग जैसे कदम उठाए गए, जिससे संरक्षण विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। यह शिकायत पेरिस में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि तक पहुंची और वहां आधिकारिक चिंता जताई गई।
डीओएएम का दृष्टिकोण
पाकिस्तान के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग (डीओएएम) ने इन कार्यों को गंभीर उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि सीमेंट का उपयोग ऐतिहासिक प्रामाणिकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाता है और यह यूनेस्को के संरक्षण मानकों के खिलाफ है। विभाग ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इन स्थलों को ‘डेंजर लिस्ट’ में डाल दिया जा सकता है।
1980 में तक्षशिला आर्कियोलॉजिकल कॉम्प्लेक्स को विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। यह 18 स्थलों का समूह है, जो नवपाषाण काल से लेकर 5वीं सदी तक के शहरी विकास और बौद्ध संस्कृति के विकास को दर्शाता है।
पंजाब पुरातत्व विभाग का बयान
वहीं, पाकिस्तान स्थित पंजाब पुरातत्व विभाग ने इन आरोपों को खारिज किया है। विभाग के महानिदेशक ने कहा कि यह कार्य “जरूरी संरक्षण” के तहत किया गया ताकि संरचनाएं और अधिक खराब न हों। उनका दावा है कि सभी कार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार किए गए हैं, और मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ पुराने “गलत” कंक्रीट कार्यों को हटाया गया है और छिपी हुई ऐतिहासिक विशेषताओं जैसे प्राचीन जलकुंड को पुनर्जीवित किया जा रहा है। साथ ही, पर्यटकों की सुविधाओं जैसे रेस्टोरेंट, धर्म कक्ष और गेस्ट हाउस का विकास बफर जोन के बाहर किया गया है।
वैश्विक साख पर प्रभाव
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान कई अन्य ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में संरक्षण के तरीकों पर उठ रहे सवाल उसकी वैश्विक साख और विश्व धरोहर संरक्षण के प्रति गंभीरता को प्रभावित कर सकते हैं।
पाकिस्तान की प्राचीन धरोहरों, खासकर तक्षशिला और अन्य स्थल, संरक्षण में कोताही और विवादित कार्यों के कारण यूनेस्को की डेंजर लिस्ट में शामिल होने के खतरे में हैं। जबकि डीओएएम ने चेतावनी दी है, पंजाब पुरातत्व विभाग ने संरक्षण को सही ठहराया है। इस विवाद का असर पाकिस्तान की वैश्विक साख और विश्व धरोहर परियोजनाओं पर पड़ सकता है।