Delhi Red Fort Blast : दिल्ली के रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम हुए भयानक कार बम विस्फोट से जुड़े ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ की जांच में मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के महू शहर का नाम सामने आया है। विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। ब्लास्ट के मुख्य संदिग्ध डॉक्टर उमर नबी और अन्य आरोपी हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे।
इस यूनिवर्सिटी का ट्रस्ट मूल रूप से महू के निवासी जवाद अहमद सिद्दीकी ने स्थापित किया था, जो यूनिवर्सिटी के चांसलर और ट्रस्ट चेयरमैन हैं। 2001 में निवेश ठगी के आरोप में जवाद का परिवार महू से रातोंरात गायब हो गया था। अब महू पुलिस उनके पुराने रिश्तेदारों और संपर्कों की तलाश में जुटी है।
महू से फरीदाबाद तक का सफर (Delhi Red Fort Blast):
जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से महू के कायस्थ मोहल्ले के रहने वाले हैं। उनके पिता मोहम्मद हामिद शहरकाजी रह चुके थे। जवाद ने 1995 में अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की, जो अल्पसंख्यक छात्रों के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया का विकल्प बनने का दावा करता था।
1997 में फरीदाबाद के धौज गांव में इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू किया, जिसे 2014 में हरियाणा सरकार ने यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। 2013 में NAAC से ‘A’ ग्रेड मिला। यूनिवर्सिटी में मेडिकल कॉलेज और 650-बेड अस्पताल भी है। जवाद कई अन्य कंपनियों जैसे अल-फलाह सॉफ्टवेयर, एक्सपोर्ट्स और एनर्जी लिमिटेड के डायरेक्टर भी हैं।
ठगी का काला अध्याय: 2001 में निवेशक लुटे (Delhi Red Fort Blast)
महू में जवाद का परिवार 2001 में अल-फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी चलाता था, जो दोगुना मुनाफे का लालच देकर लोगों से पैसे लूटती थी। जब निवेशक पैसा लौटाने की मांग करने लगे, तो कंपनी ने वादे पूरे नहीं किए। इससे गुस्साए निवेशकों ने दबाव बनाया, जिसके बाद जवाद और उनका परिवार रातोंरात महू छोड़कर दिल्ली चले गए। जवाद के भाई हमीद के खिलाफ महू थाने में ठगी का केस दर्ज हुआ था। एक 2000 की रिपोर्ट में जवाद की गिरफ्तारी का भी जिक्र है। एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी ने पुष्टि की कि परिवार महू के कायस्थ मोहल्ले में रहता था।
यूनिवर्सिटी पर जांच का शिकंजा (Delhi Red Fort Blast) –
ब्लास्ट से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद में 2,900 किलो विस्फोटक, असॉल्ट राइफल और पिस्टल बरामद कीं। इसमें तीन डॉक्टर शामिल थे –
डॉ. मुजम्मिल गनई (35) : अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस लेक्चरर और इमरजेंसी विंग मैनेजर। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 30 अक्टूबर को गिरफ्तार किया।
डॉ. उमर नबी : पुलवामा का रहने वाला, यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर। ब्लास्ट वाली ह्युंडई i20 कार को 29 अक्टूबर से 10 नवंबर तक कैंपस में पार्क किया था। संदिग्ध सुसाइड बॉम्बर।
डॉ. आदिल अहमद राथर : सहारनपुर से, मॉड्यूल का हिस्सा।
ये डॉक्टर पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़े थे। यूनिवर्सिटी के बिल्डिंग नंबर 17, रूम 13 से पाक हैंडलर्स से संपर्क की बात सामने आई। एनआईए जांच ले रही है, जिसमें यूनिवर्सिटी को RDX जैसे विस्फोटकों के लिए लैब के रूप में इस्तेमाल करने का शक है। सोमवार को यूनिवर्सिटी पर छापेमारी हुई, और तीन और डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया। कैंपस में 76 एकड़ में फैला यह संस्थान अब ‘रेडिकल एक्टिविटीज’ के खिलाफ हैकर्स के निशाने पर है—’इंडियन साइबर अलायंस’ ने वेबसाइट हैक कर चेतावनी दी।
महू पुलिस की कार्रवाई (Delhi Red Fort Blast)
महू थाना पुलिस जवाद के रिश्तेदारों और पुराने दोस्तों से पूछताछ कर रही है। एएसपी द्विवेदी ने कहा कि परिवार की फरारी पुरानी है, लेकिन दिल्ली ब्लास्ट से कनेक्शन की पड़ताल जरूरी है। यह घटना शिक्षा संस्थानों में उग्रवाद की घुसपैठ पर सवाल खड़े कर रही है। जवाद ने अभी कोई बयान नहीं दिया। जांच एजेंसियां कश्मीर, हरियाणा, यूपी और एमपी के लिंक्स खंगाल रही हैं।