438 करोड़ की परियोजना, 2 साल में पूरा होगा निर्माण
करीब 438.29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को 25 मार्च 2026 को मंजूरी दी गई है। इसे ओपन टेंडर प्रक्रिया के जरिए चुनी गई निजी कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा। निर्माण कार्य को पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगेगा, जबकि इस परियोजना की कुल अवधि 30 साल तय की गई है।
जहां पोर्ट की क्षमता और दक्षता
इस पुनर्विकास के बाद बर्थ नंबर 9 की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 10.90 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी। साथ ही, ऑपरेटर कंपनी को पांचवें साल तक कम से कम 7.63 एमटीपीए कार्गो हैंडल करने की सप्लाई देनी होगी।
यहां कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलपीजी जैसे जैविक बल्क कार्गो को संभालेगा, जिससे देश की ऊर्जा पैदावार को पूरा करने में मदद मिलेगी।
बड़े जहाजों के लिए बनेगी नई सुविधा
इस प्रोजेक्ट के तहत बर्थ की गहराई को 10.5 मीटर से बढ़ाकर 14 मीटर किया जाएगा और भविष्य में इसे 19.8 मीटर तक बढ़ाने की योजना भी रखी गई है। इससे 2 लाख डेडवेट टन तक के बड़े जहाज आसानी से यहां आ-जा सवार, जिनमें बहुत बड़े गैस कैरियर भी शामिल हैं।
50 साल पुराने आइडिया की जगह आधुनिक स्ट्रक्चर
करीब 50 साल पुराने आइडिया को यहां आधुनिक और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, जिसकी उम्र भी लगभग 50 साल तक होगी। इससे पोर्ट का ऑपरेशन लंबे समय तक स्थिर और प्रभावी बना रहेगा।
वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत होगी
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनवाल ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, पोर्ट की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी मजबूत स्थिति बना सकेगी।