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ईरान में मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, एक्सपर्ट बोले- अमेरिका से और बढ़ सकता है टकराव


नई दिल्ली। ईरान के मौजूदा नेतृत्व ने देश के नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई को नियुक्त कर दिया है। उन्हें अयातुल्ला अली खामेनेई का उत्तराधिकारी बनाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ईरान के अमेरिका के साथ समझौते की बजाय टकराव की नीति को मजबूत करने का संकेत देता है।

ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है। विदेश नीति, रक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम फैसलों पर अंतिम अधिकार उसी के पास होता है। साथ ही वह राष्ट्रपति और संसद के कामकाज को भी दिशा देता है। यानी कई मामलों में सुप्रीम लीडर की ताकत राष्ट्रपति से भी अधिक मानी जाती है।

ट्रंप के लिए झटका माना जा रहा फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी झटका माना जा सकता है। ट्रंप ने पहले मोजतबा को कमजोर नेता बताते हुए उनकी संभावित नियुक्ति को खारिज किया था और यह भी संकेत दिए थे कि नए सुप्रीम लीडर के चयन में उनकी राय अहम होनी चाहिए।

गौरतलब है कि युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया है। इस कदम को तेहरान में कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

अमेरिका के लिए ‘बेइज्जती’ जैसा कदम

मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एलेक्स वटांका के मुताबिक इतने बड़े सैन्य अभियान के बाद भी अगर 86 वर्षीय नेता की जगह उसके और ज्यादा कट्टरपंथी बेटे को सत्ता मिल जाए तो यह अमेरिका के लिए बड़ी असहज स्थिति है।

विश्लेषकों का कहना है कि मोजतबा का चयन एक स्पष्ट संदेश देता है कि ईरान फिलहाल समझौते की राह नहीं, बल्कि सख्त रुख और जवाबी कार्रवाई की नीति अपनाने की तैयारी में है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो पॉल सलेम ने कहा कि मोजतबा के नेतृत्व में ईरान के लिए आने वाले दिन कठिन हो सकते हैं। उनका मानना है कि मोजतबा ऐसे नेता नहीं हैं जो अमेरिका के साथ समझौता करने या अपनी रणनीति बदलने के लिए तैयार हों।

पिता से भी ज्यादा कट्टर बताए जाते हैं मोजतबा

पूर्व अमेरिकी राजनयिक और ईरान विशेषज्ञ एलन आयर के मुताबिक मोजतबा खामेनेई को उनके पिता से भी ज्यादा सख्त और कट्टर माना जाता है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) भी उन्हें पसंदीदा उम्मीदवार मानती रही है।

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ने शिया इस्लाम की शिक्षा ईरान के कोम स्थित धार्मिक मदरसों में प्राप्त की है। उन्हें ‘हुज्जतुल इस्लाम’ की उपाधि मिली हुई है, जो शिया धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक दर्जा माना जाता है।

अमेरिका ने 2019 में मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध भी लगाया था। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप था कि किसी आधिकारिक सरकारी पद पर न होने के बावजूद वे अपने पिता के प्रतिनिधि की तरह काम करते हुए सत्ता के फैसलों पर प्रभाव डालते रहे हैं।

आर्थिक संकट और सख्त नीतियों की चुनौती

ईरान पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और बढ़ती गरीबी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इसके साथ ही सरकार की कड़ी नीतियों के कारण जनता में असंतोष और विरोध प्रदर्शन भी बढ़े हैं।ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा के सामने देश की आंतरिक चुनौतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी। कई विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में उनके पास सख्त रुख अपनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं, चाहे युद्ध समाप्त ही क्यों न हो जाए।

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