MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की हवाई उड़ानें अब जनता के गले की हड्डी बन गई हैं। विधानसभा में पेश आधिकारिक आंकड़ों ने खुलासा किया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में सरकार हर रोज औसतन 20-21 लाख रुपये सिर्फ किराए के विमान और हेलिकॉप्टर पर खर्च कर रही है।
11 महीनों में ही रिकॉर्ड 90.7 करोड़ रुपये फूंक दिए गए (MP News)
जानकारी के अनुसार, जनवरी 2021 से नवंबर 2025 तक कुल 290 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जिसमें सिर्फ 2025 के 11 महीनों में ही रिकॉर्ड 90.7 करोड़ रुपये फूंक दिए गए। यह अब तक का सबसे महंगा साल है। पहले 2019 में सालाना खर्च महज 1.63 करोड़ था, यानी छह साल में खर्च 56 गुना बढ़ गया।
फिक्स्ड-विंग विमान उड़ान के लायक नहीं बचा (MP News)
सरकार ने खुद किराए की दरें 20-30 प्रतिशत तक बढ़ाई हैं – अब एक घंटे की उड़ान के लिए 5.70 लाख तक देने पड़ रहे हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि राज्य का अपना एक भी फिक्स्ड-विंग विमान उड़ान के लायक नहीं बचा और सिर्फ एक हेलिकॉप्टर चल रहा है। 2021 में क्रैश हुआ सरकारी प्लेन आज तक ग्वालियर एयरबेस पर धूल फांक रहा है। नतीजा – पूरी तरह निजी कंपनियों पर निर्भरता और बेकाबू खर्च।
27,000 करोड़ सिर्फ ब्याज चुकाना पड़ रहा (MP News)
इधर राज्य का कर्ज 20,000 करोड़ से बढ़कर 4.64 लाख करोड़ हो चुका है और हर साल 27,000 करोड़ सिर्फ ब्याज चुकाना पड़ रहा है। ऐसे में रोज 21 लाख का हवाई खर्च विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस विधायकों प्रताप ग्रेवाल और पंकज उपाध्याय ने सवाल उठाया कि जब जनता कर्ज के बोझ तले दब रही है, तब सरकार का यह “हवाई शौक” कहां तक जायज है।
सरकार कोविड, चुनाव और ईंधन की बढ़ती कीमत को वजह बता रही है, लेकिन जनता पूछ रही है – अपना बेड़ा ठीक करवाने में इतने साल क्यों लग गए? आंकड़े साफ बता रहे हैं कि मोहन सरकार का हवाई किराया अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर चुका है और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।