MP News : जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे) ने सागर जेल अधीक्षक की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। सजा पूरी होने के बावजूद कैदी को 17 दिन अतिरिक्त जेल में रखने के मामले में अधीक्षक पर 25 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया है। यह राशि उनसे वसूल कर सरकारी खजाने में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या था मामला? (MP News)
टीकमगढ़ के डीगोड़ा थाना क्षेत्र के मड़वारा निवासी अरविंद कुशवाहा को डीजे वाहन से एम्प्लीफायर चोरी के आरोप में 5 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे 1 साल की सजा सुनाई। सजा की अवधि 4 नवंबर 2025 को पूरी हो गई, लेकिन जेल प्रशासन ने उसे 20 नवंबर 2025 तक रिहा नहीं किया – यानी 17 दिन अतिरिक्त हिरासत।
जेल अधीक्षक पर जुर्माना (MP News)
अरविंद ने इस अवैध हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अधिवक्ता संजना यादव ने पक्ष रखा कि मुवक्किल को गैरकानूनी रूप से जेल में रखा गया, जो गंभीर लापरवाही है। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए जेल अधीक्षक पर जुर्माना लगाया। साथ ही अरविंद को 17 दिनों की अवैध हिरासत के लिए उचित मुआवजा मांगने की स्वतंत्रता दी गई है।
कोर्ट ने इसे “न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन” माना और जेल प्रशासन को सख्त चेतावनी दी। अब अरविंद रिहा हो चुके हैं। यह फैसला जेलों में कैदियों की रिहाई प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है।