MP Tiger Death : भोपाल। ‘टाइगर स्टेट’ मध्यप्रदेश में इस साल (13 दिसंबर तक) 54 बाघों की मौत हो चुकी है, जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत (1973) के बाद किसी एक साल में सबसे ज्यादा है। इनमें से आधे से अधिक मौतें अप्राकृतिक बताई जा रही हैं, जिनमें शिकार की आशंका प्रमुख है। इसे देखते हुए वन विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है और आदतन शिकारियों व अंतरराष्ट्रीय तस्करों की तलाश तेज कर दी है। विशेष रूप से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के क्षेत्रों में शिकार की कोशिशें बढ़ने की खुफिया जानकारी मिली है।
मृत बाघों में 10 शावक और 11 मादा शामिल हैं। फरवरी और अक्टूबर में सबसे ज्यादा 7-7 मौतें दर्ज की गईं। वन विभाग के अनुसार, कई संदिग्ध लोग बांधवगढ़ और आसपास सक्रिय हैं। मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक सुभरंजन सेन ने सभी वन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दिन-रात संयुक्त गश्त बढ़ाई जाए। संवेदनशील क्षेत्रों (कोर जोन के बाहर या गांवों के पास बाघों के विचरण वाले इलाकों) में अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाए।
मुखबिर तंत्र मजबूत करने के निर्देश (MP Tiger Death):
– पूर्व में गिरफ्तार आदतन शिकारियों की पतासाजी कर निगरानी पंजी में दर्ज करें।
– ग्रामीणों, चरवाहों, कोटवारों, फील्ड स्टाफ और पुलिस इंटेलिजेंस से सूचनाएं लेकर विश्लेषण करें।
– जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त पेट्रोलिंग टीम बनाएं।
यह स्थिति बाघ संरक्षण के लिए गंभीर बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्राकृतिक मौतों (शिकार, करंट, जहर आदि) में बढ़ोतरी इंटेलिजेंस और पेट्रोलिंग की कमी दर्शाती है।