नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आज तेजी से काम कर सकता है, लेकिन इंसानी दिमाग की क्षमता के सामने यह हमेशा पीछे रहेगा। ये बातें डीयू में आयोजित लीडर्स टॉक में इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने कही। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि AI को सहयोगी टूल के रूप में अपनाएं, सीखें और उसके साथ नए प्रयोग करें।
AI को सहयोगी बनाएं, इंसानी दिमाग को बॉस रखें
नारायण मूर्ति ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक और गणितज्ञ स्टीफेन वुलफ्राम का हवाला देते हुए बताया कि AI उच्च स्तरीय कार्य कर सकता है, जैसे रिमोट सर्जरी करना, उत्पादों को सही नाप-तौल के साथ तैयार करना, कोड जेनरेट करना और सॉफ्टवेयर बनाना। लेकिन AI को लगातार प्रशिक्षित करना पड़ेगा। इसलिए मानव मस्तिष्क हमेशा बॉस की भूमिका में रहेगा और इसे और बेहतर बनाने के लिए नए प्रयोग करता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI के आने से इंसानी रचनात्मकता बाधित नहीं होगी। बल्कि, यह इंसान के काम को आसान बनाने और नए विचारों को जन्म देने में मदद करेगा।
बड़ा उद्यमी नहीं, सम्मान है लक्ष्य
बड़ा उद्यमी नहीं, सम्मान है लक्ष्य
नारायण मूर्ति ने कहा कि व्यापार में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ मुनाफा नहीं, बल्कि सम्मान और भरोसा है। उनका मानना है कि असली पहचान आपसी सम्मान और विश्वास से बनती है। उन्होंने जीवनभर सबसे बड़ा उद्यमी बनने के बजाय सम्मान कमाने को प्राथमिकता दी।
युवाओं के लिए अहम संदेश
युवा पीढ़ी लगातार नई स्किल्स सीखती रहे।
खुद को बदलती तकनीक के अनुसार ढालें।
सीखने की क्षमता यानी लर्नेबिलिटी सबसे महत्वपूर्ण गुण है।
ड्रोन से ऑटोनॉमस डिलीवरी, AI का बढ़ता रोल
ड्रोन आधारित डिलीवरी सेवा देने वाली कंपनी स्काई एयर मोबिलिटी ने एआई समिट में एंड-टू-एंड ऑटोनॉमस कॉमर्स डिलीवरी सिस्टम का प्रदर्शन किया। यह पूरी तरह स्वचालित प्रणाली है, जो बिना किसी मानवीय मदद के ड्रोन के माध्यम से ग्राहकों तक सामान पहुंचाती है।
कंपनी ने अराइव एआई और ओटोनॉमी के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है। पिछले दो वर्षों में 36 लाख से अधिक सामान की डिलीवरी की जा चुकी है। कंपनी का कहना है कि AI और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग से भविष्य में डिलीवरी सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।