नई दिल्ली:देश के प्रखर समाजवादी चिंतक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर राष्ट्रभर में उन्हें रक्षाबंधन के अवसर पर इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके विचारों और योगदान को याद करते हुए कहा कि गरीबों और संप्रदायों के संप्रदाय के प्रति उनकी विचारधारा आज भी देश को प्रेरित करती है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने केवल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को एकजुट नहीं किया बल्कि आजादी के बाद भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समाजवादी विचारधारा केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने लैंगिक समानता और सहभागी शासन जैसे सिद्धांतों पर भी गहनता से अपने सिद्धांत पर जोर दिया, आज भी समग्र विकास और लोकतांत्रिक विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में सुझाव दिए गए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रयोगशाला को याद दिलाते हुए कहा कि वे आजादी के आंदोलन से लेकर समाज सुधार तक हर क्षेत्र में सक्रिय हैं, उन्होंने शिक्षा और स्वभाषा के लिए वकालत की और अपने आचरण से सामाजिक जीवन में शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नडडा ने उन्हें सामाजिक न्याय का संदेश देते हुए कहा कि छोटू ने अपना पूरा जीवन समूह के विकास के लिए अपना विचार समर्पित किया है और आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि समाज के शोषित और कृषि उत्पादों के केंद्र उनके प्रयासों को हमेशा प्रेरणा देते रहे हैं, वहीं किरण रिजिजू ने कहा कि समाज के शोषित और कृषि उत्पादों की दिशा में दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
विपक्ष के अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉली ने अपने जीवन में असंगत सामाजिक न्याय और जनभागीदारी के सिद्धांतों को स्वीकार किया है और अंतिम व्यक्ति तक विकास की दिशा तय की है, उनके विचार आज भी एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण में प्रेरणा देते हैं।
देश के विभिन्न राज्यों के नेताओं ने भी इस अवसर पर अपने विचारों को याद किया, योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, भजन लाल शर्मा, नायब सिंह सैनी और पुष्कर सिंह धामी सहित कई लोगों ने अपने विचारों को याद करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति को याद किया। तक विकास संकल्प के संकल्प को परिभाषित करें
राम मनोहरला का जीवन और उनके विचार भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि वे आज भी देश के विकास के लिए समान विचारधारा वाले हैं और उनकी विरासत हमें सिखाती है कि सच्चा लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब समाज का हर वर्ग और सहभागी बने।