पोर्ट ऑफ रिफ्यूज का महत्व
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, पोर्ट ऑफ रिफ्यूज वह स्थान होता है जहां जहाज संकट की स्थिति में स्थिर होकर जीवन बचाने, माल की सुरक्षा करने और पर्यावरणीय नुकसान कम करने के लिए आश्रय ले सकते हैं। विश्व की प्रमुख समुद्री अर्थव्यवस्थाओं में यह सुविधा आम है, लेकिन भारत ने अब तक औपचारिक रूप से ऐसा कोई ढांचा स्थापित नहीं किया था।
भारत की तटरेखा और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर असर
APSEZ भारत की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती एकीकृत परिवहन कंपनी है, जो देश के बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम का लगभग 27 प्रतिशत संभालती है। CEO अश्वनी गुप्ता ने कहा, “समर्पित POR स्थापित करके हम भारत की समुद्री तैयारियों को अपग्रेड कर रहे हैं और विश्व स्तरीय तटीय सुरक्षा के लिए नया मानदंड स्थापित कर रहे हैं। यह कदम जीवन और समुद्री अर्थव्यवस्था की सुरक्षा में महत्वपूर्ण है।”
दो प्रमुख बंदरगाह होंगे POR के रूप में
APSEZ ने दो स्थलों को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज के रूप में नामित किया है:
दिघी बंदरगाह (पश्चिमी तट): अरब सागर और फारस की खाड़ी की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात को सुविधा देगा।
गोपालपुर बंदरगाह (पूर्वी तट): बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले मार्गों पर जहाजों को सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
इन पोर्ट्स में विशेष उपकरण और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया टीमें होंगी जो बचाव, जहाज मलबा हटाने, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण और आपातकालीन समन्वय जैसी सेवाएं प्रदान करेंगी।
विशेषज्ञों की टिप्पणियां
शिपिंग के डायरेक्टर जनरल श्याम जगन्नाथन ने कहा, “मानकीकृत POR फ्रेमवर्क से समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान अधिक समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई संभव होगी। इससे जीवन, माल और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।”
एसएमआईटी साल्वेज के MD रिचर्ड जानसेन ने कहा, “किसी दुर्घटनाग्रस्त जहाज को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज प्रदान करना बचाव अभियान में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के प्रमुख शिपिंग मार्गों पर तेज़, सुरक्षित और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।”
वैश्विक मानक और सुरक्षा
यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलनों के अनुरूप है और सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शिपिंग कॉरिडोर में भारत की भूमिका को मजबूत करती है। इससे भारत समुद्री सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पर्यावरणीय प्रबंधन के वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम बढ़ा रहा है।