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NH-30 : मौत का गलियारा या शापित हाइवे? 5 साल में 500 मौतें, ब्लैक स्पॉट्स की खौफनाक हकीकत

NH-30 : मौत का गलियारा या शापित हाइवे? 5 साल में 500 मौतें

MP News : मंडला। जबलपुर के बरेला से छत्तीसगढ़ की चिल्फी घाटी तक 150 किमी लंबा नेशनल हाइवे-30 विकास की रेखा कहलाता था, लेकिन आज यह “मौत का गलियारा” बन चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 सालों में यहां 500 से ज्यादा मौतें और 2000 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। 11 ब्लैक स्पॉट – बरेला घाट, कुड़ामैली, बबेहा पुल, बिनैका तिराहा, अंजनिया, बिछिया, सिझौरा और चिल्फी घाटी – ने इसे खूनी हाइवे बना दिया है।

हादसों की वजहें (MP News):

– खड़ी ढलान और अंधे मोड़ – ब्रेक फेल हो जाते हैं
– खराब डिजाइन और निर्माण में भ्रष्टाचार
– ट्रक ड्राइवरों ने बताया: “ढलान वॉटर पार्क स्लाइड जैसी है, लेकिन यहां मौत स्लाइड करती है”

केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने 7 नवंबर 2022 को मंडला दौरे पर हाइवे की बदहाली के लिए जनता से हाथ जोड़कर माफी मांगी थी। BJP नेता शैलेश मिश्रा ने भी कमियों को स्वीकार किया। लेकिन आज तक ढलान कम नहीं हुई, मौतें थम नहीं रही।

बंजारी माता का “शाप” (MP News)

ग्रामीण मानते हैं कि पुराने हाइवे पर बंजारी माता का मंदिर निर्माण में हटा दिया गया, लेकिन दोबारा स्थापित नहीं किया। माता रुष्ट हैं और बबेहा पुल पर हादसे इसी का नतीजा हैं। वास्तु सलाहकार मनीष अवस्थी ने रातें बिताकर जांच की तो कहा – “यहां सूक्ष्म ऊर्जा नकारात्मक है, विज्ञान और पराविज्ञान दोनों संकेत दे रहे हैं।”

सिस्टम से सवाल (MP News)

2014-15 में करोड़ों खर्च कर बना यह हाइवे आज मजाक बन चुका है। ट्रक ड्राइवर, कार चालक और स्थानीय लोग एक स्वर में कहते हैं – “यह हाइवे नहीं, मौत का जाल है।” SP रजत सकलेचा ने 11 ब्लैक स्पॉट्स की पुष्टि की।

NH-30 पर गिरता हर खून का कतरा सिस्टम से पूछ रहा है – अगली मौत का जिम्मेदार कौन? बंजारी माता का मंदिर हो या री-इंजीनियरिंग – समाधान अब जरूरी है। यह हाइवे विकास की नहीं, मौत की कहानी कह रहा है।

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