प्रखर गुप्ता के साथ पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए शाहिद कपूर ने कहा कि उन्हें कभी भी फेक पीआर या बनावटी छवि गढ़ने में भरोसा नहीं रहा। उनके मुताबिक मार्केटिंग जरूरी है लेकिन यह समझना उससे भी ज्यादा जरूरी है कि कहां सच्चाई खत्म होती है और कहां बनावट शुरू हो जाती है। शाहिद ने माना कि जब कला में मिलावट आ जाती है तो उसका असर कलाकार और दर्शक दोनों पर पड़ता है।
शाहिद कपूर ने कला के महत्व को समझाते हुए कहा कि लोगों से भरे एक कमरे में तालियां और सीटियां सुनना किसी जादू से कम नहीं होता। जब लोग आपको पहचानते हैं और एक खास दर्जा देते हैं तो वह एहसास बेहद खूबसूरत होता है। यही वजह है कि आर्ट और सिनेमा समाज के लिए जरूरी हैं। लेकिन जब इस शुद्धता में बनावट घुसने लगती है तो वह एहसास खत्म होने लगता है और सिनेमा अपनी आत्मा खो देता है।
बातचीत के दौरान शाहिद कपूर ने दर्शकों के घटते अटेंशन स्पैन पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज की ऑडियंस का धैर्य पहले जैसा नहीं रहा। लोगों का दिमाग लंबे समय तक फोकस नहीं कर पाता और उन्हें बार बार उत्तेजना और ब्रेक की जरूरत महसूस होती है। इसके पीछे उन्होंने डोपामाइन के प्रभाव का जिक्र किया और कहा कि यह आदत दर्शकों के साथ साथ क्रिएटर्स को भी प्रभावित कर रही है।
शाहिद के मुताबिक यह एक दोतरफा प्रक्रिया है। एक तरफ दर्शकों का धैर्य कम हो रहा है और दूसरी तरफ क्रिएटर्स भी उसी तरह के कंटेंट में फंसते जा रहे हैं। जब फिल्ममेकर्स गहराई से सोचकर और ध्यान लगाकर काम करना चाहते हैं तो उनकी रचनात्मक क्षमता प्रभावित होती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसा नहीं है कि दर्शक फिल्में देखना नहीं चाहते बल्कि सच्चाई यह भी है कि हम उतनी अच्छी फिल्में बना ही नहीं पा रहे हैं जितनी बनानी चाहिए।
शाहिद कपूर की अपकमिंग फिल्म ओ रोमियो की बात करें तो यह फिल्म 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म का निर्देशन विशाल भारद्वाज ने किया है जिनके साथ शाहिद की जोड़ी पहले भी कई यादगार फिल्में दे चुकी है। ओ रोमियो में शाहिद के साथ तृप्ति डिमरी नजर आएंगी। शाहिद के इस बेबाक बयान के बाद फैंस को अब न सिर्फ फिल्म का बल्कि उनके किरदार और कहानी का भी बेसब्री से इंतजार है।