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विश्व रेडियो दिवस पर पीएम मोदी ने रेडियो को बताया भरोसेमंद साथी, ‘मन की बात’ के लिए जनता से मांगे सुझाव


नई दिल्ली।विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो को एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बताते हुए इसकी अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रेडियो ने दशकों से देश के कोने-कोने में लोगों को जोड़ने का काम किया है और आज भी यह सूचना, प्रेरणा और संवाद का एक मजबूत जरिया बना हुआ है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात के आगामी संस्करण के लिए सुझाव देने की अपील भी की।

प्रधानमंत्री ने विश्व रेडियो दिवस के मौके पर सोशल मीडिया मंच X पर संदेश साझा करते हुए कहा कि यह दिन उस माध्यम का उत्सव मनाने का अवसर है, जिसने समय की कसौटी पर खुद को हमेशा साबित किया है। उन्होंने रेडियो को एक ऐसी “भरोसेमंद आवाज़” बताया जो दूर-दराज के गांवों से लेकर बड़े शहरों तक लोगों को एक सूत्र में बांधे रखती है। उनके अनुसार, रेडियो ने वर्षों से लोगों तक समय पर जानकारी पहुंचाने, नई प्रतिभाओं को मंच देने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि रेडियो केवल एक तकनीकी माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी है। यह उन लाखों लोगों के प्रयासों का परिणाम है जो इस माध्यम से जुड़े हैं और निरंतर लोगों तक सटीक जानकारी और मनोरंजन पहुंचाते हैं। प्रधानमंत्री ने इस दिन को उन सभी लोगों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी बताया, जिन्होंने रेडियो को आज भी प्रासंगिक बनाए रखा है।

अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने खुद महसूस किया है कि रेडियो किस तरह लोगों की सामाजिक ताकत और सकारात्मक पहलों को सामने लाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने आम नागरिकों, समाजसेवियों और नवाचार करने वाले लोगों की कहानियों को देशभर तक पहुंचाने का काम किया है, जिससे प्रेरणा और जागरूकता दोनों का विस्तार हुआ है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे 22 फरवरी को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ के अगले एपिसोड के लिए अपने सुझाव और विचार साझा करें। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम की असली ताकत जनता की भागीदारी में है और लोगों के सुझाव ही इसे और अधिक प्रभावी बनाते हैं।

गौरतलब है कि ‘मन की बात’ एक मासिक रेडियो कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देशवासियों से सीधे संवाद करते हैं और समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों, जमीनी स्तर की पहलों और प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं। इसमें स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक विकास जैसे कई विषयों पर चर्चा की जा चुकी है। साथ ही ऐसे लोगों के कार्यों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाता है, जिन्होंने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव लाने में योगदान दिया है।

हर साल 13 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व रेडियो दिवस इस बात की याद दिलाता है कि रेडियो आज भी संचार का एक सशक्त और सुलभ माध्यम है। खासतौर पर भारत जैसे विशाल देश में, जहां दूरदराज के इलाकों में अन्य संचार साधनों की पहुंच सीमित हो सकती है, वहां रेडियो सूचना और मनोरंजन का भरोसेमंद स्रोत बना हुआ है। यही कारण है कि बदलते समय और नई तकनीकों के बीच भी रेडियो की प्रासंगिकता आज तक बनी हुई है।

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