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कभी दिखाते थे आंखें… अब ईंधन के लिए भारत के आगे फैला रहे हाथ…


नई दिल्ली।
ईरान और अमेरिका युद्ध (Iran and America war) के कारण आए ईंधन संकट (Fuel Crisis) का असर भारत के पड़ोसियों पर भी पड़ा है। खबर है कि श्रीलंका, नेपाल समेत कई देशों ने भारत से सप्लाई की गुहार लगाई है। वहीं, इनमें मालदीव (Maldives) भी शामिल है। खास बात है कि मालदीव सरकार कभी भारत के खिलाफ खुलकर बात कर रही थी। बहरहाल, भारत में इन अनुरोधों पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में ईरान ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz.) से निकलने को लेकर भारत में हमारे दोस्तों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।


किसने मांगा ईंधन

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल मालदीव भारत से ईंधन मांग रहा है। भारत अपने पड़ोसी देशों को लगातार ईंधन भेज रहा है। उन्होंने बताया कि भारत कॉमर्शियल समझौतों के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की सप्लाई कर रहा है। खास बात है कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है।


मालदीव की मांग

उन्होंने जानकारी दी कि मालदीव सरकार ने भी हमसे शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों आधार पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई के लिए संपर्क किया है। मालदीव के इस अनुरोध पर हमारी अपनी उपलब्धता और हमारी अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है। विश्व बैंक के डाटा के अनुसार मालदीव आमतौर पर अपने ज्यादातर ईंधन की सप्लाई ओमान से लेता है।

फिलहाल, मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू की सरकार है। वह चुनाव में जीतने से पहले ‘India Out’ का नारा लगा रहे थे। साथ ही उन्होंने भारतीय सैनिकों को वापस जाने के आदेश भी जारी कर दिए थे। हालांकि, अब मुइज्जू ने हाल में ही भारत को अपना भरोसेमंद साझेदार करार दे दिया है। खबर है कि पर्यटन पर बड़े स्तर पर निर्भर देश उड़ानों पर पड़े प्रभाव के कारण भी मुश्किलों का सामना कर रहा है।


बड़ी बैठक में शामिल हुआ भारत

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन में आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की आंशिक नाकेबंदी को लेकर भारत के रुख पर बात की। मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।

विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में बताया, ‘उन्होंने (मिसरी ने) इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।’ ईरान की तरफ से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे होर्मुज जलमार्ग को लगभग रोक दिए जाने के बाद वैश्विक तेल व गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस जलमार्ग से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

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